Plam Oil: इंडोनेशिया की सरकार ने पाम ऑयल पर बड़ा फैसला किया है। अपनी संसद में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने कहा कि उनका देश दुनिया में सबसे ज्यादा पाम ऑयल का उत्पादन करता है। फिर दूसरे देश उसके दाम तय करते है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। इंडोनेशिया दाम तय करेगा और जिसे खरीदना है खरीदे, नहीं तो इंडोनेशिया पाम ऑयल का इस्तेमाल खुद करेगा।
इंडोनेशिया सरकार की कमोडिटी एक्सपोर्ट पर कंट्रोल बढ़ाने की योजना है। पाम ऑयल अब सीधे बाजार में नहीं बिकेंगे। दूसरी बड़ी कमोडिटी भी सीधे बाजार में नहीं बिकेगी। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांटो ने बुधवार को कहा कि सरकार पाम ऑयल, कोयला और फेरोएलॉय के एक्सपोर्ट को एक सरकारी एजेंसी के ज़रिए करवाना ज़रूरी करेगी, क्योंकि वह नेचुरल रिसोर्स पर कंट्रोल कड़ा करना और सरकारी रेवेन्यू बढ़ाना चाहती है।
दुनिया भर में पाम ऑयल शिपमेंट में आधे से ज़्यादा इंडोनेशिया का हिस्सा है। लोकल बिक्री को प्राथमिकता देने और बायोडीज़ल की सप्लाई बढ़ाने के उसके पिछले एक्सपोर्ट-रिस्ट्रिक्टिंग कदमों ने पाम ऑयल के साथ-साथ सोया ऑयल और सूरजमुखी तेल जैसे कॉम्पिटिटर खाने के तेलों की कीमतें बढ़ा दी हैं।
पाम ऑयल मार्केट पहले से ही बढ़ती बायोडीज़ल डिमांड और सूखे एल नीनो से जुड़े मौसम की वजह से कम फ्लो का सामना कर रहा था।
इंडियन एडिबल ऑयल इंपोर्टर पतंजलि फूड्स (PAFO.NS) के वाइस प्रेसिडेंट आशीष आचार्य ने रॉयटर्स को कहा, "पाम ऑयल मार्केट मिडिल ईस्ट विवाद की वजह से बढ़ती एनर्जी की कीमतों के हिसाब से खुद को एडजस्ट करने की कोशिश कर रहा है।" "इंडोनेशिया के इस कदम से अनिश्चितता की एक और परत जुड़ सकती है और मार्केट में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।"
इंडोनेशिया सरकार का दावा है कि इससे ट्रैकिंग और मॉनिटरिंग मजबूत होगी। इस कदम से फर्जी ट्रांसफर प्राइसिंग पर कार्रवाई होगी। एक्सपोर्ट फ्रॉड, गलत इनवॉयसिंग पर रोक लगेगी। एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई पर निगरानी होगी। इन कदमों से सरकार की आय भी बढ़ेगी ।
पाम ऑयल की पूरी सप्लाई चेन बदल सकती है। ग्लोबल बाजार में कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव की आशंका है। भारत जैसे बड़े इंपोर्टर देशों पर असर पड़ सकता है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा पाम ऑयल इंपोर्टर है।
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