Poultry Industry Growth: भारत में पशुपालन अब ₹17 लाख करोड़ का बड़ा बाजार बन चुका है, ये कहना है कि CLFMA के चेयरमैन दिव्य कुमार गुलाटी का। सीएनबीसी-आवाज से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि मक्के की कीमतें एथेनॉल ब्लेंडिंग की वजह से बढ़ रही हैं, जिससे पोल्ट्री इंडस्ट्री पर असर पड़ रहा है। भारत की पोल्ट्री इंडस्ट्री हर साल 8-10% की दर से बढ़ रही है और गल्फ व CIS देशों में इसकी भारी डिमांड है।
बता दें कि इस इंडस्ट्रीज को पशुपालन से जुड़ी चुनौतियां का भी सामना करना पड़ता है जिसमें पालन-पोशन लागत में बढ़ोतरी, प्रतिकूल मौसम के चलते बुरा असर, बाजार में अस्थिरता का माहौल, चारा की कीमतों में बढ़ोतरी जैसे कई समस्याए है। मक्का और सोयाबीन की कीमतों में तेजी भी पशुपालन इंडस्ट्रीज के लिए चुनौती बन कर उभर रही है।
दिव्य कुमार गुलाटी ने इस बातचीत में आगे कहा कि लेंड एरिया सीमित है, लेकिन पोल्ट्री, डेयरी और झिंगा इंडस्ट्रीज में तेजी से ग्रोथ देखने को मिल रही है। जब इंडस्ट्रीज ग्रो होगी तो इसके लिए रॉ मटेरियल रिक्वारमेंट भी उसी अनुसार बढ़ेगी।
फ्यूल में एथेनॉल के इस्तेमाल के कारण 8-9 मैट्रिक टन कॉर्प का डायवर्जन हुआ है। जिस कारण से कॉर्प की शॉर्टेज का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आगे कहा कि एथेनॉल ब्लेंडिंग की वजह चारे की कीमतें बढ़ रही हैं। मक्के का ज्यादातर इस्तेमाल पॉल्ट्री इंडस्ट्री में होता है।
दिव्य कुमार गुलाटी ने आगे कहा कि जैसे-जैसे प्रोटीन को लेकर लोगों में जागरुकता बढ़ती रहेगी वैसे-वैसे कंजम्शन भी बढ़ती रहेगी। गल्फ और CIS देश हमारे लिए बहुत बड़ा बाजार है।
गौरतलब हो कि आम बजट 2025-26 में पशुपालन और डेयरी विभाग को 4840.40 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले इसमें 7 प्रतिशत का इजाफा किया गया है। 2024-25 में केंद्र सरकार ने पशुपालन और डेयरी विभाग को 4521.24 करोड़ रुपये आवंटित किए थे।