कोरोना महामारी से उबरने के बाद टायर इंडस्ट्री की तरफ से रबड़ की मांग बढ़ी जिससे इसके भाव मजबूत हुए। हालांकि एक बार फिर कमजोर मांग और अधिक आवक के चलते भारतीय नेचुरल रबड़ की कीमतें दो साल के निचले स्तर पर पहुंच गई। टायर इंडस्ट्री आरएसएस-4 वैरायटी का रबड़ इस्तेमाल करती है और इसके भाव अभी 137.5 रुपये प्रति किग्रा हैं। पिछले दो महीने में यह करीब 8 फीसदी सस्ता हुआ है। रबड़ के भाव पर चीन में कोरोना महामारी के उफान ने भी निगेटिव असर डाला है। इसके अलावा विदेशी बाजारो में चुनौतीपूर्ण स्थितियों ने भी रबड़ के भाव को नीचे लाया है।
इससे पहले टायर इंडस्ट्री ने अनुमान लगाया था कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही अक्टूबर-दिसंबर 2022 में मांग बढ़ेगी लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। गाड़ियों की बिक्री में तेज उछाल नहीं दिख रही है और अब कोरोना के चलते भी कारोबार को झटका लग रहा है।
चीन में कोरोना से रबड़ इंडस्ट्री को बड़ा झटका क्यों
पिछले कुछ महीने से अधिक सप्लाई और चीन में कोरोना के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रबड़ की कीमतें गिर रही हैं। चीन में कोरोना के फैलने से रबड़ इंडस्ट्री को झटका इसलिए लग रहा है क्योंकि यह सबसे बड़ी कंज्यूमर है। चीन में कोरोना महामारी तेजी से फैल रही है तो यहां सख्ती बढ़ रही है। इसका असर कारोबार पर भी दिख रहा है नतीजतन रबड़ की मांग भी घट रही है।
रबड़ के उत्पादन पर मौसम की मार
देश में पिछले साल रबड़ की खपत में 13 फीसदी का इजाफा हुआ था जबकि उत्पादन महज 8 फीसदी बढ़ा था। वित्त वर्ष 2021-22 में 12.38 लाख टन की रिकॉर्ड खपत हुई थी लेकिन इस वित्त वर्ष में रुझान उल्टा दिख रहा है। इस समय मांग कम है और सप्लाई अधिक है लेकिन आगे उत्पादन के प्रभावित होने का असर दिख रहा है। रबड़ बोर्ड ने वित्त वर्ष 2023 में 8.5 लाख टन रबड़ के उत्पादन का अनुमान लगाया था लेकिन अब 8 लाख टन का ही अनुमान है।
इंडियन रबड़ डीलर्स फेडरेशन के प्रेसिडेंट जॉर्ज वैली के मुताबिक पिछले दो महीने से भारी बारिश के चलते इसका उत्पादन प्रभावित हुआ है। देश में सबसे अधिक रबड़ केरल में पैदा होता है और इसके बाद त्रिपुरा में। इसके अलावा दुनिया भर में रबड़ के सबसे बडे़ उत्पादक थाईलैंड में भी मौसम की मार से इसकी फसल प्रभावित हुई है।
उत्पादन गिरने के बावजूद भाव में तेजी के आसार नहीं
रबड़ एनालिस्ट और एक्सपर्ट Jom Jacob के मुताबिक कुछ समय से रबड़ के भाव में गिरावट है। रबड़ की फसल प्रभावित होने के चलते उत्पादन प्रभावित हुआ है लेकिन जैकब के मुताबिक इसका कीमतों पर खास असर नहीं दिखेगा क्योंकि पिछले पांच महीने से सप्लाई की तुलना में इसका स्टॉक लगातार अधिक है और कोरोना के साथ-साथ मंदी के चलते भी इसकी मांग प्रभावित हुई है।
रबड़ के मांग में गिरावट का असर रबड़ और इसके प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनियों के शेयरों पर भी दिख रहा है। एक महीने में अधिकतर स्टॉक्स टूटे हैं। एक महीने में 9 फीसदी से अधिक गिरावट रही। एपकोटेक्स इंडस्ट्रीज के शेयर एक महीने में 9 फीसदी से अधिक टूटे हैं। इसके अलावा एमआरएफ, अपोलो टायर्स, सीट, ट्यूब इंवेस्टमेंट ऑफ इंडिया, जेके टायर, सोमी कंवेयर बेल्टिंग्स पर भी दिख रहा है।