Silver Gold Price Today : 4 नवंबर को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में उछाल आया है। इसकी वजह अमेरिकी डॉलर का कमजोर होना और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट रही है। इसके अलावा अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के नतीजों ने सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में इनकी अपील को और मजबूत किया है। 2026 के मध्यावधि चुनावों में अमेरिकी डेमोक्रेट्स ने कांग्रेस के दोनों सदनों पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। इससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगा है।
कमोडिटी विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के नतीजों ने ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट की अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है। इसके चलते शॉर्ट टर्म के लिए सोने-चांदी का आउटलुक अच्छा हो गया है।
इंटरनेशनल मार्केट में गोल्ड स्पॉट के भाव में 2.34 प्रतिशत की तेजी आई है और यह 4,023 डॉलर प्रति औंस के थोड़ा ऊपर पहुंच गया है। सुबह के कारोबार के बाद से एक ही सेशन में इसमें 102 डॉलर की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, पिछले 24 घंटों में चांदी की कीमत 4 प्रतिशत बढ़कर 52 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गई है। अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 2.30 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,031.10 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है। चांदी 3.83 प्रतिशत बढ़कर 52 डॉलर के करीब आ गई है।
MCX पर सोने-चांदी में तेजी
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 4 दिसंबर की डिलीवरी वाला गोल्ड फ्यूचर्स 2.08 प्रतिशत बढ़कर 1,42,353 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। जबकि सिल्वर फ्यूचर्स अपने पिछले बंद भाव से 3.55 प्रतिशत बढ़कर 1,86,081 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रहा है।
डॉलर इंडेक्स में गिरावट से सपोर्ट
सुबह के कारोबार में डॉलर इंडेक्स 0.54 प्रतिशत गिरकर 101.17 पर आ गया था। जबकि फ्यूचर्स ट्रेड में ब्रेंट क्रूड 0.49 प्रतिशत बढ़कर 103.09 डॉलर प्रति बैरल पर नजर आ रहा था। इससे बुलियन (सोना-चांदी) को सपोर्ट मिला।
आगे कैसी रह सकती है इनकी चाल?
बोनान्ज़ा पोर्टफोलियो के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट निरपेंद्र यादव का कहना है कि अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों के कारण अमेरिकी डॉलर कमजोर हुआ और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट आई है। ये सोने के लिए अच्छा संकेत है। बुधवार को सोने की कीमतों में तेजी आई है। निवेशक कांग्रेस के नियंत्रण में बदलाव की संभावना और ट्रम्प प्रशासन के नीतिगत एजेंडे पर इसके असर पर नजरें रखे हुए हैं।
एनालिस्ट्स का कहना है कि चांदी पर इस बदलावा का असर कुछ मिला-जुला हो सकता है। हालांकि डॉलर के कमजोर होने और यील्ड में कमी से इसे कुछ सहारा मिल सकता है,लेकिन इंडस्ट्रियल डिमांड और मैक्रो इकोनॉमिक ग्रोथ को लेकर बनी चिंताएं इसकी रिकवरी को सीमित कर सकती हैं।
निरपेंद्र यादव ने कहा कि सोने की तुलना में चांदी में अधिक उतार-चढ़ाव रहने की संभावना है। अमेरिकी चुनाव के नतीजे कीमती धातुओं को कुछ समय के लिए राहत दे सकते हैं,लेकिन इस बात की संभावना कम है कि वे अपने दम पर बाजार के बड़े रुझान को बदल पाएंगे।
उनका सुझाव है कि निवेशकों को अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड, डॉलर इंडेक्स, फेडरल रिजर्व की दरों की दिशा और भू-राजनीतिक घटनाओं पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। कीमती धातुओं (बुलियन) में हालिया गिरावट के बाद, किसी भी तरह की रिकवरी के लिए केवल राजनीतिक अनिश्चितता पर निर्भर रहने के बजाय, लगातार खरीदारी बनी रहने और बेहतर फंडामेंटल्स की जरूरत होगी।
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