एथनॉल प्रोडक्शन में गन्ने के इस्तेमाल पर रोक से 5% घट सकती हैं चीनी की कीमतें: सरावगी

बलरामपुर चीनी मिल्स के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) विवेक सरावगी का कहना है कि चीनी की कीमतों में कम से कम 5 पर्सेंट गिरावट का अनुमान है। दरअसल, सरकार ने हाल में एक नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसमें एथनॉल के प्रोडक्शन में गन्ने के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है। यह सरकारी आदेश 7 दिसंबर को जारी किया गया

अपडेटेड Dec 08, 2023 पर 8:10 PM
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अगर चीनी के प्रोडक्शन में 15 से 17 लाख टन की बढ़ोतरी होती है, तो इसका सीधा असर टारगेट प्राइस पर होगा।

बलरामपुर चीनी मिल्स के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) विवेक सरावगी का कहना है कि चीनी की कीमतों में कम से कम 5 पर्सेंट गिरावट का अनुमान है। दरअसल, सरकार ने हाल में एक नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसमें एथनॉल के प्रोडक्शन में गन्ने के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है। यह सरकारी आदेश 7 दिसंबर को जारी किया गया, जिससे देश के शुगर प्रोडक्शन में बढ़ोतरी होगी, जबकि एथनॉल का उत्पादन कम होगा। सरावगी के मुताबिक, अगर चीनी के प्रोडक्शन में 15 से 17 लाख टन की बढ़ोतरी होती है, तो इसका सीधा असर टारगेट प्राइस पर होगा।

उन्होंने कहा कि इस वजह से चीनी उत्पादन करने वाली कंपनियों का संभावित नुकसान कीमतों में कमी के आधार पर निर्भर करेगा। वित्त वर्ष 2024 की पहली तिमाही में देश की प्रमुख चीनी उत्पादक कंपनी बलराम चीनी मिल्स (Balrampur Chini Mills) का नेट प्रॉफिट 73.5 करोड़ रुपये रहा था। शेयर बाजार में 8 दिसंबर को कंपनी का शेयर 3.72 पर्सेंट की गिरावट के साथ 393.20 करोड़ रुपये पर बंद हुआ।

सरावगी के मुताबिक, कंपनी गन्ने के अपने कुल स्टॉक का तकरीबन 10 पर्सेंट हिस्सा (1.2 करोड़ क्विंटल) एथनॉल के प्रोडक्शन में करने वाली थी। उन्होंने कहा, ' हालांकि, गन्ने का यह स्टॉक बर्बाद नहीं होगा। इसका इस्तेमाल अलग प्रोडक्ट बनाने में किया जाएगा।' कुल एथनॉल प्रोडक्शन में गन्ने के जूस की हिस्सेदारी तकरीबन 28 पर्सेंट है और इससे शुगर मिलों को सबसे ज्यादा कीमत ( 65.61 रुपये प्रति लीटर) भी मिलती है।


एथनॉल का 50 पर्सेंट से भी ज्यादा हिस्सा शुगर के बाय-प्रोडक्ट शीरा से मिलता है, जिस पर सरकार ने पाबंदी नहीं लगाई है। इसका मौजूदा रेट 60.73 रुपये प्रति लीटर है। शुगर इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस साल शुगर प्रोडक्शन कम रहने की वजह से एथनॉल का प्रोडक्शन कम रह सकता है। साथ ही, इस ताजा फैसले से हालात और खराब हो सकते हैं और एथनॉल मिलाने का केंद्र सरकार का लक्ष्य पूरा नहीं हो सकता है। सरकार ने 2022-23 में 12 पर्सेंट एथनॉल मिलाने का टारगेट हासिल किया था और मौजूदा वित्त वर्ष में सरकार ने इसे बढ़ाकर 15 पर्सेंट कर दिया है। केंद्र सरकार ने 2020 तक पेट्रोल में 20 पर्सेंट एथनॉल मिलाने का लक्ष्य हासिल किया है।

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