सनफ्लावर ऑयल की कीमतों में तेजी देखने को मिली। फ्यूचर्स में भाव $1,270 प्रति टन के पास पहुंचा। 1 जुलाई को 8 महीनों के निचले स्तर $1,133.7 तक फिसला था। डिमांड बढ़ने से फिर से कीमतों में तेजी आने लगी। दरअसल, कीमतों में ये उछाल यूक्रेन में सूखा पड़ने के कारण आया।
ग्लोबल एक्सोपर्ट का यूक्रेन की 70% भागीदारी है। दक्षिणी यूक्रेन में सूखे के कारण उत्पादन में गिरावट देखने को मिला। जून में क्रशिंग वॉल्यूम में 11% की कमी आई। सालाना आधार पर क्रशिंग वॉल्यूम 21% गिरा है। यूरोप में मांग बढ़ रही है। यूरोप में कीमतें $1,160–1,200/टन के करीब पहुंची।
महंगे पाम ऑयल के चलते सनफ्लावर ऑयल की डिमांड बढ़ी है जबकि भारत में सनफ्लावर ऑयल का इंपोर्ट बढ़ा है। भारत का जून में इंपोर्ट 18% बढ़ाकर 2.16 लाख टन रहा। नई फसल को लेकर चिंता से खरीदारी बढ़ी है।
सनफ्लावर ऑयल का प्रोडक्शन 53 मिलियन टन संभव है। भारत सबसे ज्यादा सनफ्लावर ऑयल का इंपोर्ट रूस से करता है। आने वाले दिनों में प्रति महीने 14-15 लाख टन एडिबल ऑयल इंपोर्ट संभव है।
किसानों के हितों का ख्याल रखना सरकार की प्राथमिकता है। आने वाले दिनों में सनफ्लावर ऑयल में नीचे 40 और ऊपर 60 डॉलर का अंतर दिख सकता है।