द सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (Solvent Extractors Association of India) यानी SEA ने खाने के तेल की अलग- अलग पैकेजिंग के मुद्दे पर सरकार को चिट्ठी लिखी है। द सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया ने सरकार को चिट्ठी लिख खाने के तेल के पैकेज को स्टैंडराइज करने की अपील की है। SEA के मुताबिक अलग-अलग वजन की पैकेजिंग खाने का तेल बिक रहा है। 800, 810, 850, 870 ग्राम की पैकेजिंग में बिक्री हो रही है। SEA का कहना है कि वजन में इतना अंतर लोगों में भ्रम पैदा करता है। इससे तेल का सही दाम भी तय करना मुश्किल है। सरकार इस तरह की पैकेजिंग को रोके। स्टैंडर्ड पैकेजिंग को जरूरी बनाने की अपील की है।
खाने के तेल पर दिखा टैरिफ का असर
इंटरनेशनल मार्केट में खाने के तेल की कीमतों में गिरावट दिख रही है। चाहे पाम हो या फिर सोयाबीन सभी में दबाव है। पाम ऑयल 4200 रिंग्गित तक फिसला है। 2 अप्रैल को सोयाबीन का भाव 4500 रिंग्गित के पार थे। सनफ्लावर ऑयल 2025 के हाई से 4% गिरा। सनफ्लावर ऑयल 325 डॉलर प्रति टन के नीचे फिसला है।2025 के हाई से सरसों का भाव 5% गिरा है। सरसों का भाव 530 यूरो/टन के नीचे फिसला। 2025 के हाई से सोयाबीन 7% से ज्यादा गिरा। फरवरी में सोयाबीन$1075/बुशेल तक पहुंचा था।
SEA के डॉ. बी. वी. मेहता ने कहा कि बाजार में तय सीमा से कम तेल की बिक्री हो रही है । 1 लीटर के पैकेट में 910 ग्राम से लेकर 800 ग्राम तक तेल बिक रहा है। उनका कहना है कि कम मात्रा में तेल मिलना लोगों के साथ धोखा है रहा है। हमारी अपील है कि सरकार इन कंपनियों के खिलाफ जल्द से जल्द एक्शन लें।
स्काईमेट ने मॉनसून पर अपना पूर्वानुमान जारी कर दिया है। जिसके मुताबिक इस साल देश में मॉनसून सामान्य रहेगा। वहीं ला-नीना से भी देश को राहत मिलेगी। स्काईमेट के मुताबिक इस साल सामान्य मॉनसून का अनुमान है। LPA का 103% मॉनसून रह सकता है। पिछले साल LPA का 108% मॉनसून रहा था। स्काई मेट के मुताबिक नीना के भी जल्द बनने की उम्मीद है। 1971-2020 के बीच औसतन 87 सेंटीमीटर बारिश हुई। 1971-2020 के बीच LPA का 96-104% बारिश रही।
केरल, कर्नाटक, कोंकण और गोवा में जून महीने में अधिक बारिश होगी.मध्य भारत (मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़) में अच्छी बारिश की संभावना है। असम, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में कम बारिश हो सकती है। पश्चिमी घाट (महाराष्ट्र और कर्नाटक) में जुलाई में ज्यादा बारिश हो सकती है।
स्काईमेट के अनुसार इस साल एल-नीनो (El Niño) कमजोर हो रहा है, जिससे मानसून पर ज्यादा बुरा असर नहीं पड़ेगा। स्काईमेट के मुताबिक इस साल मॉनसून ‘सामान्य’ रह सकता है। इस साल मानसून औसत के 5% ऊपर या नीचे रहने की गुंजाइश भी रखी है।