Wheat exports : केंद्र ने गेहूं प्रोडक्ट पर बड़ा कदम उठाते हुए 5 लाख टन गेहूं उत्पादों - आटा, मैदा और सूजी के एक्सपोर्ट (निर्यात) को मंजूरी दे दी है। बता दें कि एक्सपोर्ट पर लगे प्रतिबंध में यह आंशिक ढील तीन साल से अधिक समय के अंतराल के बाद दी गई है। केंद्र सरकार ने साल 2022 में गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था।
सरकार की 5 लाख टन एक्सपोर्ट को मंजूरी दी है लेकिन इंडस्ट्री की 10 लाख टन एक्सपोर्ट की मांग थी। बता दें कि गेहूं के एक्सपोर्ट पर अभी फैसला नहीं हुआ।
सरकार ने निर्यात की प्रक्रिया को काफी नियंत्रित रखा है। जारी किए गए आदेश के अनुसार, सभी निर्यातकों को डीजीएफटी की वेबसाइट के माध्यम से ही आवेदन करना होगा। आवेदन का पहला चरण 21 जनवरी, 2026 से 31 जनवरी, 2026 तक खुला रहेगा।
जब तक 5 लाख टन का कोटा पूरा नहीं हो जाता, हर महीने के आखिरी 10 दिनों में आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। निर्यात का परमिट जारी होने की तारीख से छह महीने के लिए ही वैध होगा। निर्यातकों को माल भेजने के 30 दिनों के भीतर "लैंडिंग सर्टिफिकेट" जमा करना अनिवार्य होगा।
एक्सपोर्ट को क्यों मिली मंजूरी
सरकार के पास गेहूं का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। मंडियों में भी गेहूं की आवक अच्छी बनी हुई है। गेहूं का अगला उत्पादन भी बंपर होने की उम्मीद है। घरेलू बाजार भाव में नरम या स्थिरता बने हुए हैं। यहीं कारण है कि सरकार ने गेहूं प्रोडक्ट के एक्सपोर्ट को मंजूरी मिली।
फ्लोर मिलर्स, प्रोसेसर्स एक्सपोर्ट कर पाएंगे। एक्सपोर्ट के लिए IEC, FSSAI लाइसेंस जरूरी है। राइस मिलर्स, प्रोसेसर्स को ऑनलाइन अप्लाई करना होगा। आवेदन का पहला दौर 21–31 जनवरी 2026 तक होगा। सरकार से मिली मंजूरी छह महीने तक मान्य रहेगी।
बता दें कि सरकार ने साल 2022 में ही गेहूं और उसके उत्पादों के निर्यात पर रोक लगा दी थी, लेकिन कुछ जरूरतमंद देशों को इसका निर्यात जारी रहा। जैसे चालू वित्तवर्ष में सरकार ने 2 लाख टन गेहूं नेपाल को दिया। इसी तरह, भूटान और माली सहित अन्य देशों को भी जरूरत पर सोने का निर्यात किया गया। हालांकि, इस आपात निर्यात को छोड़ दिया जाए तो अप्रैल से अक्टूबर 2025 तक महज 12 हजार टन गेहूं का ही निर्यात हुआ है। सरकार ने महंगाई की वजह से गेहूं के निर्यात पर बैन लगा रखा है।