लुधियाना में गेहूं प्रोक्योरमेंट में कमी आई है। गेहूं की ढुलाई में 25% की कमी आई। इस साल केवल 42 रैक गेहूं रेक भेजे गए। पिछले साल 56 रैक भेजे गए थे। इस सीजन में कुल 1.2 लाख मीट्रिक टन गेहूं की ढुलाई हुई। जबकि पिछले साल के 1.5 लाख मीट्रिक की ढुलाई हुई थी।
सरकारी एजेंसियों द्वारा गेहूं की खरीदारी में कमी आई है। 7.15 लाख मीट्रिक टन से घटकर 6.48 लाख मीट्रिक टन खरीदारी हुई है। निजी खरीदारों ने इस साल 1.68 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जबकि पिछले साल के 1.13 लाख मीट्रिक टन से 48% ज्यादा है।
इस साल गेहूं उत्पादन में बढ़ोतरी
ज्यादातर गेहूं उत्पादक राज्यों में अनुकूल मौसम के चलते उत्पादन बढ़ा है। MP में सरकारी खरीद पर 175 प्रति क्विंटल का बोनस मिला है। राजस्थान सरकार का भी सरकारी खरीद पर 150 प्रति क्विंटल का बोनस दिया है । यूपी और पंजाब से प्राइवेट ट्रेडर्स और कंपनियों ने भारी मात्रा में गेहूं खरीदा है जबकि अधिकतर राज्यों में इस समय गेहूं के बाजार भाव MSP से ऊपर बने हुए है।
WPPS के चेयरमैन अजय गोयल ने कहा कि हरियाणा और पंजाब में भी गेहूं की प्राइवेट प्रोक्योरमेंट हुई है। पिछले साल का अनुभव ऐसा रहा है जिसके चलते हर आदमी अपना हेंज बना कर चल रहा है। ऐसे में गेहूं की खरीद भी बढ़ती दिख रही है। पिछले साल के मुकाबले इस साल गेहूं की 3-5% ज्यादा प्रोडक्शन (उत्पादन) संभव है।
अजय गोयल ने इस बातचीत में आगे कहा कि जून खत्म होने के बाद सरकार के पास कितना स्टॉक मौजूद है यह बता चलेगा। अगर राइस को देखें तो ऑक्शन हफ्ते में 2 बार किया जा रहा है। सरकार के पास जब स्टॉक जरुरत से ज्यादा होता है तो माल को बाहर निकालने के कई रास्ते तलाशती है। हो सकता है एक रेगुलेटेड मैनर में सरकार आटा एक्सपोर्ट की इजाजत दे सकती है।