Covid-19 के अलग-अलग वेरिएंट पूरी दुनिया में कहर बरपा कर रहे हैं। B.1.1.7 (अल्फा), B.1.351 (बीटी), P.1 (गामा); B.1.427 और B.1.429 (Epsilon), B.1.617.2 (Delta)और डेल्टा प्लस वेरिएंट के बाद अब दुनिया में कोरोना के एक और वेरिएंट की खोज हुई है। इसको लैंब्डा वेरिएंट ( Lambda variant) नाम दिया गया है।
पिछले हफ्ते इंग्लैंड के हेल्थ विभाग ने कोरोना के Lambda variant (C.37) को इसके अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फैलते संक्रमण को देखते हुए अपनी वेरिएंट अंडर इंवेस्टीगेशन लिस्ट में शामिल किया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 14 जून को लैंब्डा वेरिएंट को वैरियंट ऑफ इंट्रेस्ट के तौर पर श्रेणीबद्ध किया था। ब्रिटेन में लैंब्डा वेरिएंट से संक्रमण के अब तक 6 मामले सामने आए है और इन सभी का संबंध विदेश यात्रा से है। सबसे पहले इसकी पहचान पेरु में की गई थी और अबतक 26 देशों में यह मिल चुका है।
WHO ने कहा है कि Lambda variant के स्पाइक प्रोटीन में मल्टिपल म्यूटेशन हुए हैं जिससे इसकी संक्रमण की दर पर प्रभाव पड़ा होगा। लेकिन इस म्यूटेशन को समझने के लिए इस पर अभी और स्टडी की जरूरत है।
लैंब्डा वेरिएंट ( Lambda variant) की खास बातें
लैंब्डा वेरिएंट ( Lambda variant) यानी C.37 वेरिएंट को पेरू में हाईली प्रीवेलेंट (काफी फैला हुआ) के तौर पर सूचिबद्ध किया गया है। ये वारिएंट B.1.1.1 वंशावली (lineage) से संबंधित है। WHO के मुताबिक पेरू में अप्रैल से अब तक मिले कोरोना मामलों में 81 फीसदी मामले Lambda variant से ही संबंधित हैं। दुनिया के 29 देशों में ये वेरिएंट मिल चुका है। इसमें उत्तरी और दक्षिणी अमेरिकी, यूरोप और ओसीनिया के देश शामिल हैं।
अब तक भारत में कोरोना के Delta और Delta Plus वेरिएंट मिले हैं। हालांकि जानकारों का कहना है कि इंटरनेशनल ट्रैफिक के खुलने के साथ ही भारत में लैंब्डा सहित करोना के कई कॉकटेल वेरिएंट का प्रवेश हो सकता है।