बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की SREI इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस (SIFL) और SREI इक्विपमेंट फाइनेंस (SEFL) के खिलाफ कार्रवाई के खिलाफ SREI ग्रुप की याचिका को खारिज कर दिया था। इस याचिका में दोनों कंपनियों के खिलाफ इनसॉल्वेंसी प्रोसीडिंग को शुरू करने पर रोक लगाने की भी मांग की गई थी।
SREI ग्रुप के फाउंडर हेमंत कनोरिया ने मनीकंट्रोल को दिए इंटरव्यू में बताया कि लेंडर्स को बकाया रकम पर बड़े नुकसान से बचाने के लिए वे केवल IBC के बाहर रिजॉल्यूशन की कोशिश कर रहे हैं।
लेंडर्स का SREI ग्रुप की कंपनियों पर लगभग 30,000 करोड़ रुपये का बकाया है। लिक्विडिटी की कमी, बॉरोअर्स की ओर से भुगतान नहीं मिलने और इनवेस्टर्स को लाने में नाकाम रहने के कारण SREI ग्रुप का संकट का सामना करना पड़ रहा है।
कनोरिया ने बताया कि वे कानूनी विकल्पों को नहीं तलाश रहे। उन्होंने कहा कि अब RBI को कदम उठाना है क्योंकि उसने पहले ही SREI के बोर्ड का कंट्रोल ले लिया है।
कनोरिया ने बताया कि RBI के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दी जाएगी। उनका कहना था कि अगर IBC के बाहर सेटलमेंट होता है तो इससे लेंडर्स को बकाया रकम पर बड़ा नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि वे देश के सिस्टम का सम्मान करते हैं और RBI और सरकार के फैसले का पालन किया जाएगा।