ABG Group Bank Fraud Case: कंपनी के प्रमोटर ऋषि अग्रवाल को CBI ने गिरफ्तार किया, 22000 करोड़ रुपए के बैंक घोटाले का आरोप

ABG शिपयार्ड ने एक दो नहीं बल्कि 28 बैंकों के कंसोर्शियम को धोखा दिया है। ऋषि अग्रवाल ने 2012 से लेकर 2017 के बीच इन बैंकों को 22,842 करोड़ रुपए की चपत लगाई थी

अपडेटेड Sep 22, 2022 पर 12:15 AM
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ABG शिपयार्ड ने एक दो नहीं बल्कि 28 बैंकों के कंसोर्शियम को धोखा दिया है

ABG Group Bank Fraud Case: देश के सबसे बड़े घोटाला मामले में ABG शिपयार्ड के प्रमोटर ऋषि अग्रवाल को आज CBI ने गिरफ्तार कर लिया। उन पर बैंकों को 22,000 करोड़ रुपए का चूना लगाने का आरोप है। ऋषि अग्रवाल को IPC की अलग-अलग कई धाराओं में गिरफ्तार किया गया है। CBI ने ऋषि अग्रवाल के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने, धोखा देने, अपने रुतबे का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है।

ABG शिपयार्ड ने एक दो नहीं बल्कि 28 बैंकों के कंसोर्शियम को धोखा दिया है। ऋषि अग्रवाल ने 2012 से लेकर 2017 के बीच इन बैंकों को 22,842 करोड़ रुपए की चपत लगाई थी। यह मामला इस साल फरवरी में ही सामने आया था। जिन बैंकों को ऋषि अग्रवाल ने चूना लगाया है उनमें SBI, IDBI Bank और ICICI Bank शामिल हैं।

क्या यह देश का सबसे बड़ा बैंक घोटाला है?


देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई ने एबीजी शिपयार्ड, इसके पूर्व चेयरमैन और एमडी ऋषि अग्रवाला और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इन पर 28 बैंकों को 22,842 करोड़ रुपये का चूना लगाने का आरोप है। यह रकम नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के 12,000 करोड़ रुपये के पीएनबी घोटाले से बहुत बड़ा है। पीएनबी से पहले विजय माल्या ने कई सरकारी और प्राइवेट बैंकों को चूना लगाया था। यह घोटाला भी करीब 9,000 करोड़ रुपये का था।

कैसे सामने आया घोटाला?

एबीजी शिपयार्ड का यह घोटाला तब सामने आया जब ईएंडवाई ने 2019 में जांच की। उसने अप्रैल 2012 से जुलाई 2017 की अवधि की फॉरेंसिक जांच की। जांच में यह पाया गया कि इस अवधि में कंपनी ने फ्रॉड किया। इसमें बैंक से कर्ज के रूप में लिए गए पैसों का गलत इस्तेमाल भी शामिल था। लोन के पैसे से अधिकारियों ने विदेश में प्रॉपर्टी तक खरीदे। लोन के पैसा का इस्तेमाल कंपनी ने समूह की दूसरी कंपनियों के लिए किया गया। सूत्रों का कहना है कि बैंकों ने कंपनी को यह पैसा 2005 से 2010 के बीच दिया था। लेकिन, फ्रॉड ईएंडवाई की जांच के बाद सामने आया।

कैसे डूब गया कंपनी का बिजनेस?

कंपनी में भ्रष्टाचार का असर इसके बिजनेस पर पड़ने लगा। एक तरफ बैंकों का लोन बढ़ता गया, दूसरी तरफ इसकी आमदनी घटती गई। कार्गो की डिमांड घटने से इसके बुरे दिन शुरू हो गए। कंपनी को शिप बनाने के लिए मिले ऑर्डर कैंसल होने लगे। सरकार ने भी इसे ऑर्डर देने बंद कर दिए। दबाव बहुत बढ़ने के बाद कंपनी के अकाउंट्स को 2013 में नॉन-परफॉर्मिंग एसेट घोषित कर दिया गया। दोबारा 2017 में इसके लोन की रीस्ट्रक्चरिंग की गई। लेकिन कंपनी का कारोबार पटरी पर लौटने में नाकाम रहा। फिर, एबीजी शिपयार्ड का मामला नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) को भेज दिया गया।

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