केपीआईटी टेक्नोलॉजीज के फाउंडर और चेयरमैन एसबी (रवि) पंडित का 8 मई को पुणे में निधन हो गया। वह 71 साल के थे। केपीआईटी भारत की सबसे बड़ी ऑटोमोटिव एवं मोबिलिटी सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग कंपनियों में से एक है। कंपनी ने फाउंडर और चेयरमैन के देहांत पर दुख जताया है।
1990 में KPIT की शुरुआत की थी
रवि पंडित ने 1990 में किशोर पाटिल के साथ मिलकर KPIT की शुरुआत की थी। तब कंपनी का नाम केपीआईटी कमिंस था। पंडित की लीडरशिप में केपीआईटी एक बड़ी आईटी सर्विसेज और कंसल्टिंग कंपनी बनी। कंपनी के पास ऑटोमोटिव और मोबिलिटी सॉफ्टवेयर में विशेषज्ञता है। कंपनी की मौजूदगी दुनिया के 15 देशों में है।
अमेरिका की MIT से की थी पढ़ाई
पंडित ने पुणे इंटरनेशनल सेंटर और जनवाणी की शुरुआत में भी बड़ी भूमिका निभाई थी। केपीआईटी की वेबसाइट के मुताबिक, उन्होंने गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स एंड इकोनॉमिक्स जैसे संस्थानों को अपना मार्गदर्शन दिया था। उन्होंने अमेरिका के MIT में Sloan School of Management से पढ़ाई की थी। वह एक चार्टर्ड अकाउंटेंट थे, जिन्हें गोल्ड मेडल मिला था। वह इंडियन नेशनल साइंस एडैडमी (INSA) के फेलो भी थी।
क्लीन एनर्जी के बड़े पैरोकार थे
पंडित का क्लीन एनर्जी के इस्तेमाल पर काफी जोर था। वह नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के एम्पापर्ड ग्रुप में प्राइवेट सेक्टर से इकलौता सदस्य थे। उनका 'HRIDAY' पहल को बढ़ावा देने में बड़ा हाथ था। इस पहल का फोकस हाइड्रोजन के इस्तेमाल से ग्रामीण इलाकों में बड़ा बदलाव लाना था।
थर्मेक्स के बोर्ड का सदस्य रह चुके थे
वह अवॉर्ड-विनिंग बुक Leapfrogging to Pole-Vaulting के सह-लेखक भी थे। वह थर्मेक्स के बोर्ड का सदस्य भी रह चुके थे। केपीआईटी टेक्नोलॉजीज का शेयर 8 मई को 0.65 फीसदी उछाल के साथ 727 रुपये पर चल रहा था। इस साल यह शेयर 37 फीसदी से ज्यादा गिरा है।