Adani Ports Q1: अदाणी ग्रुप की कंपनी अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड ने आज 1 अगस्त को FY25 की पहली तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। अप्रैल-जून तिमाही में अदाणी पोर्ट्स का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 47 फीसदी बढ़ गया है। कंपनी ने इस अवधि में 3113 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया है। कंपनी को कंटेनर टर्मिनल सब्सिडियरी में हिस्सेदारी के विनिवेश से 600 करोड़ रुपये का लाभ हुआ है। इसके अलावा, टोटल रेवेन्यू में बढ़ोतरी के चलते भी कंपनी के नेट प्रॉफिट में उछाल आया है। अदाणी पोर्ट्स ने पिछले साल की समान अवधि में 2115 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था।
Adani Ports के रेवेन्यू में 11% का उछाल
मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में पोर्ट ऑपरेटर Adani Ports का रेवेन्यू 6956 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले की समान तिमाही के 6247.6 करोड़ रुपये की तुलना में 11 फीसदी अधिक है। शिपिंग सेक्टर की दिग्गज कंपनी ने Q1FY25 में बाजार के अनुमान से बेहतर नतीजे पेश किए हैं।
ब्लूमबर्ग द्वारा 8 ब्रोकरेज फर्मों के बीच कराए गए सर्वे के अनुसार अदाणी पोर्ट्स को 7007 करोड़ रुपये का रेवेन्यू प्राप्त होने की उम्मीद थी, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12 फीसदी अधिक है। इसके अलावा, सात ब्रोकरेज फर्मों ने 2292.50 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट होने का अनुमान लगाया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5 फीसदी और तिमाही आधार पर 13 फीसदी अधिक है।
Adani Ports को विनिवेश से 600 करोड़ रुपये का लाभ
तिमाही के दौरान अदाणी पोर्ट्स ने 248.54 करोड़ रुपये के लिए सब्सिडियरी कंपनी अदाणी एन्नोर कंटेनर टर्मिनल प्राइवेट लिमिटेड की 49 फीसदी इक्विटी हिस्सेदारी का विनिवेश पूरा किया और प्रॉफिट और लॉस के स्टेटमेंट में 603.27 करोड़ रुपये का लाभ दर्ज किया।
FY25 की पहली तिमाही के दौरान ADSEZ में कुल हैंडल की गई वॉल्यूम 109 MMT रही, जो एक साल पहले की तुलना में 7.6 फीसदी अधिक है, और तिमाही आधार पर फ्लैट है। गंगावरम पोर्ट में बाधा के कारण कंपनी को 5.7 MMT कार्गो वॉल्यूम का नुकसान हुआ।
APSEZ के होल टाइम डायरेक्टर और CEO अश्विनी गुप्ता ने एक बयान में कहा, "वित्तीय मोर्चे पर हमने अब तक की सबसे अधिक आय दर्ज की है। लेकिन गंगावरम पोर्ट में अस्थायी बाधा, जो अब पूरी तरह से बहाल हो गई है, हमारी Q1 कार्गो वॉल्यूम 114.7 MMT होती, जो 13% की वृद्धि है।"
कंपनी का EBITDA (फॉरेक्स को छोड़कर) 29 फीसदी बढ़कर 4848 करोड़ रुपये हो गया। घरेलू बंदरगाहों ने EBITDA में 3990 करोड़ रुपये का योगदान दिया, जबकि लॉजिस्टिक्स ने 144 करोड़ रुपये का योगदान दिया।