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BharatPe के लिए क्यों अपनी छवि को साफ-सुथरा रखना जरूरी है?

पीएमसी बैंक क्राइसिस खुद सालों तक जारी फ्रॉड और कॉर्पोरेट गवर्नेंस के उल्लंघन का नतीजा है। पीएमसी बैंक को बचाने (डूबने से) वाले बैंक का ट्रैक रिकॉर्ड शानदार और कॉर्पोरेट गवर्नेंस स्ट्रक्चर मजबूत होना जरूरी है

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 28, 2022 पर 11:56 AM
BharatPe के लिए क्यों अपनी छवि को साफ-सुथरा रखना जरूरी है?
भारतपे के बोर्ड और अशनीर ग्रोवर के बीच आरोप-प्रत्यारोप से संकेत मिलता है कि कंपनी से कुछ गहरे मसले जुड़े हैं।

हाल में भारतपे (BharatPe) के मामले में नाटकीय मोड़ आया। भारतपे के बोर्ड के चेयमैन रजनीश कुमार (Rajinsh Kumar) ने कंपनी के को-फाउंडर अशनीर ग्रोवर (Ashneer Grover) की तीखी आलोचना की। रजनीश कुमार देश के सबसे बड़े बैंक SBI के चेयरमैन रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि ग्रोवर को पूरे मामले में मैच्योरिटी दिखानी चाहिए थी। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रोवर यह साबित करना चाहते हैं कि भारतपे में कॉर्पोरेट गवर्नेंस की जांच उनके खिलाफ बायस्ड है।

कुमार ने 23 फरवरी को मनीकंट्रोल से खास बातचीत में कहा था, "मैं इस बात से सहमत हूं कि अशनीर को मैच्योरिटी (भारतपे से जुड़े विवाद में) दिखानी चाहिए थी।...अशनीर की पूरी स्ट्रैटेजी यह साबित करने की है कि गवर्नेंस रिव्यू उनके खिलाफ बायस्ड है।" उन्होंने यह भी कहा था कि अगर ऑडिट रिपोर्ट में गवर्नेंस का मसला पाया जाता है कि बोर्ड उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए तैयार है।

भारतपे एक पेमेंट कंपनी है। यह शॉपकीपर्स को क्यूआर कोड के जरिए पेमेंट लेने की सुविधा देती है। कंपनी से जुड़ा यह मसला कॉर्पोरेट गवर्नेंस के उल्लंघन से जुड़ा है। कॉर्पोरेट गवर्नेंस के उल्लंघन के आरोप को लेकर ग्रोवर और कंपनी के बोर्ड आमने-सामने हैं। मसला शुरू होने पर ग्रोवर को जबरन छुट्टी पर भेज दिया गया। बोर्ड ने उनकी पत्नी माधुरी जैन (Madhuri Jain Grover) ग्रोवर को भी छुट्टी पर जाने को कह दिया। लेकिन, यह मामला यही खत्म नहीं हो जाता है। इस मामले की शुरुआत एक ऑडियो क्लिप सामने आने से हुई थी। इसमें ग्रोवर एक बैंक के इंप्लॉयी को गाली देते सुनाई देते हैं। लेकिन, जल्द यह मामला कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़े बड़े मसले में तब्दील हो गया।

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