अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस को कमजोर करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। रूस के कई बैंकों को स्विफ्ट के इस्तेमाल से रोक दिया गया है। स्विफ्ट का मतलब है-Society for Worldwide Interbank Financial Telecommunication। इसे संक्षेप में SWIFT कहा जाता है। स्विफ्ट से रूस को बाहर करने को अमेरिका और यूरोप के सबसे सख्त कदम के रूप में देखा जा रहा है। इस फैसले ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को बैचेन कर दिया है। आइए जानते हैं क्या है SWIFT, इससे बाहर होने से रूस पर कितना असर पड़ेगा, यह कैसे काम करता है।
SWIFT सबसे बड़ा इंटरनेशनल पेमेंट गेटवे है। रूस के बैंक अब इस गेटवे का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। अमेरिका और यूरोप ने रूस को इंटरनेशनल फाइनेंशियल सिस्टम से अलग-थलग करने के लिए यह कदम उठाया है। उनका मकसद रूस को आर्थिक रूप से कमजोर करना है। माना जा रहा है कि स्विफ्ट से बाहर करने के फैसले से पुतिन बौखला गए हैं। यही वजह है कि उन्हें परमाणु हथियार के इस्तेमाल की चेतावनी दी है।
रूस के लिए कितना अहम है स्विफ्ट?
SWIFT रूस के लिए बहुत अहम है। इसकी वजह यह है कि रूस दुनिया में एनर्जी का बड़ा सप्लायर है। वह कई देशों को अरबों डॉलर मूल्य के ऑयल एंड गैस का एक्सपोर्ट करता है। इसका पेमेंट हासिल करने के लिए वह स्विफ्ट प्लेटफार्म का इस्तेमाल करता है। यह पेमेंट का बहुत आसान तरीका है। इससे रियल टाइम में ट्रांजेक्शन पूरा जाता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस प्लेटफॉर्म को बहुत ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। इससे अलग होने का मतलब फाइनेंशियल सिस्टम से अलग-थलग होना है। स्विफ्ट से बाहर करने का मतलब फाइनेंशियल वर्ल्ड में उसी तरह से है, जैसे किसी देश को इंटरनेट से अलग कर देना।
कैसे काम करता है स्विफ्ट?
स्विफ्ट का इस्तेमाल दुनिया के 200 देश और 11,000 बैंक करते हैं। यह पैसे के ट्रांसफर में मिडलमैन की भूमिका निभाता है। यह ट्रांजेक्शन की डिटेल को वेरिफाय करता है। इसके लिए वह फाइनेंशियल मैसेजिंग सर्विसेज का इस्तेमाल करता है। वेरिफाय होने के बाद ट्रांजेक्शन पूरा होता है। स्विफ्ट का ऑफिस बेल्जियम में स्थित है। 11 बड़े देशों के केंद्रीय बैंक इसकी मॉनिटरिंग करते हैं। इनमें कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, नीदरलैंड्स, स्वीडन, स्विट्जरलैंज, इंग्लैंड, बेल्जियम और अमेरिका शामिल हैं।
इस कदम का रूस पर कितना असर पड़ेगा?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि रूसी बैंकों को स्विफ्ट से अलग करने से रूस की इकोनॉमी पर बड़ा असर पड़ेगा। इससे रूस को दुनिया में पेमेंट लेने और देने के लिए दूसरे उपायों का इस्तेमाल करना होगा। इससे ट्रांजेक्शन पूरा होने में काफी वक्त लगेगा। इसका असर दूसरे देशों के साथ रूस के व्यापारिक संबंधों पर पड़ेगा। खासकर एनर्जी की सप्लाई के मामले में बड़ी दिक्कत पैदा होगी। यही वजह है कि इस कदम का रूस की मुद्रा पर बड़ा असर पड़ा है। रूबल में 30 फीसदी गिरावट आई है।
अभी सिर्फ कुछ रूसी बैंकों पर रोक
अभी रूस के सिर्फ कुछ बैंकों को स्विफ्ट का इस्तेमाल करने से रोका गया है। अमेरिका और यूरोप ने रूस के सभी वित्तीय संस्थाओं को अभी इसके दायरे में शामिल नहीं किया है। उनका मानना है कि अगर रूस अपनी मनमानी जारी रखता है तो उसके बाकी बैंकों और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस को इसके दायरे में लाया जाएगा।