सभी सेक्टरों की मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियां उत्पादन लागत के दबाव से जुझ रही हैं। जानकारों का कहना है कि आगे चलकर लागत में बढ़ोतरी के चलते मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों के आय अनुमान में गिरावट देखने को मिल सकती है लेकिन इसके विपरीत बैंकिंग सेक्टर निवेशकों के लिए राहत लेकर आ सकता है। बता दें कि निफ्टी 50 इंडेक्स में फाइनेंशियल सेक्टर से जुड़ी कंपनियों का वेटेज काफी ज्यादा है।
बता दें कि शनिवार को प्राइवेट सेक्टर के दिग्गज बैंक एचडीएफसी बैंक के नतीजे आने वाले हैं। इसी के साथ वित्त वर्ष 2022 की चौथी तिमाही के नतीजों की आने की शुरुआत हो जाएगी। बाजार दिग्गजों का कहना है कि 31 मार्च 2022 को खत्म हुई चौथी तिमाही में बैंकिंग सेक्टर के नतीजे मजबूत रह सकते हैं। बैंकों को रिटेल और कॉर्पोरेट दोनों सेगमेटों में सुधरते क्रेडिट ग्रोथ का फायदा मिलेगा। इसके अलावा प्रोविजनिंग की निम्न दर से भी बैंकिंग कंपनियों के मुनाफे में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।
एनालिस्ट का कहना है कि रिटेल लेंडिंग सेगमेंट में हाउसिंग सेक्टर के लिए लोन वितरण में आई बढ़ोतरी कायम रही है। इसके अलावा मार्च तिमाही में अनसिक्योरर्ड लोन सेगमेंट में भी तिमाही आधार पर बढ़ोतरी के संकेत मिले हैं। हालांकि माइक्रो लेंडिंग सेगमेंट में रिकवरी में सुस्ती दिखी है। इसके बावजूद बैंकिंग सेक्टर अच्छी तरह से अपने रिकवरी के रास्ते पर चल रहा है। बाजार दिग्गजों का अनुमान है कि मार्च तिमाही के नतीजों में बैंकों के नए एनपीए में गिरावट देखने को मिलेगी और इनकी एसेट क्वालिटी सुधरेगी।
नोमुरा के एनालिस्ट का कहना है कि चौथी तिमाही में HDFC Bank Ltd, ICICI Bank Ltd, Axis Bank Ltd और State Bank of India (SBI) के कारोबार में सुधार देखने को मिलेगा। फंडिंग की निम्न लागत इनके लिए ग्रोथ हासिल करने और बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने का अहम कारण साबित होगी। नोमुरा का कहना है कि Axis Bank, ICICI Bank और SBI के लोन ग्रोथ में उनके सभी कारोबारी सेगमेंट का योगदान होगा।