SBI Q4 Results: मार्च तिमाही में 24% बढ़ा मुनाफा, डिविडेंड का ऐलान

SBI march quarter results : स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने इस अवधि में 20,698 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया है। पिछले साल की समान तिमाही में बैंक का मुनाफा 16695 करोड़ रुपये था। बैंक का मुनाफा मजबूत लोन डिमांड के चलते बढ़ा है

अपडेटेड May 09, 2024 पर 2:57 PM
देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने आज 9 मई को FY24 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं।

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने आज 9 मई को FY24 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। जनवरी-मार्च तिमाही में बैंक के नेट प्रॉफिट में 24 फीसदी का उछाल आया है। बैंक ने इस अवधि में 20,698 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया है। पिछले साल की समान तिमाही में बैंक का मुनाफा 16695 करोड़ रुपये था। बैंक का मुनाफा मजबूत लोन डिमांड के चलते बढ़ा है। बैंक ने अपने शेयरधारकों के लिए डिविडेंड की घोषणा भी की है। नतीजों के बीच बैंक के शेयरों में 2.48 फीसदी की तेजी आई है। इस समय यह शेयर 830.50 रुपये के भाव पर ट्रेड कर रहा है।

अनुमान से बेहतर रहे SBI के नतीजे

मार्च तिमाही में एसबीआई ने बाजार के अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया है। एनालिस्ट्स ने 13,400 करोड़ रुपये के मुनाफे का अनुमान लगाया था। बैंक ने अपने शेयरधारकों के लिए डिविडेंड की घोषणा भी की है। निवेशकों को हर शेयर पर 13.7o रुपये का डिविडेंड जारी किया जाएगा।


SBI की एसेट क्वालिटी में सुधार 

एसबीआई की ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) पिछले साल के 2.78 फीसदी के मुकाबले 2.24 फीसदी पर आ गया, जबकि नेट एनपीए पिछले साल के 0.67 फीसदी की तुलना में 0.57 फीसदी हो गया है। मार्च तिमाही में एसबीआई की लोन ग्रोथ मजबूत रही और यह आठ तिमाहियों में सबसे अच्छी वृद्धि में से एक है। बैंक ने ग्रॉस और नेट एनपीए के बीच रेश्यो के मामले में भी 36-क्वार्टर लोन देखा।

मार्च तिमाही में एसबीआई की इंटरेस्ट इनकम 19 फीसदी बढ़कर 1.11 लाख करोड़ रुपये हो गई, जो एक साल पहले 92,951 करोड़ रुपये थी। स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में एसबीआई ने कहा, "क्रेडिट ग्रोथ सालाना आधार पर 15.24 फीसदी है, जबकि डोमेस्टिक एडवांस में 16.26 फीसदी की ग्रोथ है। कॉर्पोरेट एडवांस ने 11 लाख करोड़ रुपये और एग्री एडवांस ने 3 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है।"

Q4FY24 में कुल इनकम एक साल पहले की अवधि के 1.06 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 1.28 लाख करोड़ रुपये हो गई, जबकि ऑपरेटिंग खर्च एक साल पहले की अवधि के 29,732 करोड़ रुपये से बढ़कर 30,276 करोड़ रुपये हो गया। कुल प्रोविजन एक साल पहले की अवधि के 3,315 करोड़ रुपये से लगभग आधा होकर 1,609 करोड़ रुपये हो गया।

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