Tata Consumer Products Q1 Preview: लो बेस के कारण मुनाफे में 42.5% की बढ़त की उम्मीद

बाजार जानकारों का कहना है कि डोमेस्टिक ब्रेवरीज और फूड कारोबार में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी जबकि इंटरनेशनल ब्रेवरीज कारोबार में सुस्ती देखने को मिल सकती है

अपडेटेड Aug 09, 2022 पर 4:19 PM
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Kotak Institutional Equities का कहना है कि 30 जून 2022 को समाप्त तिमाही में कंपनी के कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में 8.6 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

देश की जानी मानी Tata Consumer Products कल अपने नतीजे घोषित करने वाली है। अनुमान है कि 30 जून 2022 को खत्म हुई 2023 की पहली तिमाही में कंपनी की कंसोलिडेटेड मुनाफे में सालाना आधार पर 42.5 फीसदी की बढ़त होगी। वहीं तिमाही आधार पर 21 फीसदी की बढ़त होगी।

इसी अवधि में कंपनी के कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में सालाना आधार पर 8.4 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है जबकि तिमाही आधार पर कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ 2.7 फीसदी हल्की बढ़त के साथ सपाट रह सकती है।

मनीकंट्रोल की तरफ से 5 ब्रोकरजेज हाउस की तरफ से कराए गए पोल से निकलकर आया है कि 30 जून 2022 को समाप्त पहली तिमाही में कंपनी का मुनाफा 264 करोड़ रुपये और रेवेन्यू 3,261 करोड़ रुपये रह सकता है।


Tata Consumer Products

बता दें कि वित्त वर्ष 2022 की पहली तिमाही में कंपनी को 3,009 करोड़ रुपये की आय पर 185 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था जबकि पिछली तिमाही यानी जनवरी मार्च तिमाही में कंपनी को 3,175 करोड़ रुपये के आय पर 218 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था।

बाजार जानकारों का कहना है कि डोमेस्टिक ब्रेवरीज और फूड कारोबार में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी जबकि इंटरनेशनल ब्रेवरीज कारोबार में सुस्ती देखने को मिल सकती है।

Kotak Institutional Equities का कहना है कि 30 जून 2022 को समाप्त तिमाही में कंपनी के कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में 8.6 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इस अवधि में कंपनी के घरेलू चाय कारोबार में सालाना आधार पर 1 फीसदी की वैल्यू ग्रोथ देखने को मिल सकती है। जबकि चाय कारोबार के वॉल्यूम में सालाना आधार पर 4 फीसदी की ग्रोथ देखने को मिल सकती है।

Kotak Institutional Equities का मानना है कि जून तिमाही में कंपनी के भारतीय फूड कारोबार की ग्रोथ सालाना आधार पर 17 फीसदी जबकि कंपनियों की सहायक कंपनियों की ग्रथ सालाना आधार पर 8 फीसदी रह सकती है। हालांकि मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी के चलते तिमाही आधार पर कंपनी के मार्जिन पर दबाव देखने को मिल सकता है।

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