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फोर्टिस के पूर्व प्रमोटर ने दी दिवालिया होने की अर्जी, कभी सबसे अमीर कारोबारियों में होती थी गिनती

फोर्टिस के पूर्व प्रमोटर शिविंदर मोहन सिंह ने NCLT में व्यक्तिगत दिवालियापन की अर्जी दी है। उन्होंने इसकी वजह दाइची विवाद और Religare में कुप्रबंधन को बताया है, क्योंकि उनकी अधिकांश संपत्ति पहले ही जब्त हो चुकी है।

MoneyControl Newsअपडेटेड Apr 21, 2025 पर 8:26 PM
फोर्टिस के पूर्व प्रमोटर ने दी दिवालिया होने की अर्जी, कभी सबसे अमीर कारोबारियों में होती थी गिनती
शिविंदर ने 3,500 करोड़ रुपये के दाइची विवाद और Religare में मिसमैनेजमेंट को अपनी दिवालिया स्थिति की वजह बताई है।

 

कभी भारत के सबसे अमीर बिजनेसमैन में गिने जाने वाले फोर्टिस के पूर्व प्रमोटर शिविंदर मोहन सिंह (Shivinder Mohan Singh) ने राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) में अपने व्यक्तिगत दिवालापन का मामला दायर किया है। इसका मतलब यह है कि उन्होंने आधिकारिक रूप से यह स्वीकार किया है कि वह अपने सभी कर्ज चुकाने में सक्षम नहीं हैं। CNBC-TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक, शिविंदर ने दावा किया है कि उनकी कुल संपत्ति उनके कर्ज से कम हैं।

शिविंदर ने दिवालिया होने की अर्जी क्यों दी?

शिविंदर ने दिवाला और ऋण शोधन संहिता (IBC) की धारा 94 का सहारा लिया है। यह इंडिविजुअल को दिवाला दाखिल करने का अधिकार देती है, जब वे अपने वित्तीय कर्ज का भुगतान नहीं कर पाते। अपने आवेदन में शिविंदर ने बताया कि अधिकांश उनकी संपत्ति पहले ही दाइची संक्यो (Daiichi Sankyo) के खिलाफ चल रहे मुकदमे के कारण अटैच या बेच दी गई हैं।

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