कॉलेज की डिग्री या स्किल, किसकी ज्यादा अहमियत है? इंडिया इंक लंबे समय से इस सवाल का जवाब खोज रहा है, क्योंकि ऑनलाइन सर्टिफिकेशन कोर्स की आसान उपलब्धता से नए तरह के कैंडीडेट तैयार हो रहे हैं। उनके पास भले ही कॉलेज की डिग्री न हो, लेकिन उनके पास जॉब के लिए सही स्किल जरूर होती है।
नई पीढ़ी की स्किल्स की भारी कमी से जूझ रहीं दिग्गज टेक कंपनियां पहले ही अपनी टैलेंट स्ट्रैटजी में बदलाव ला रही हैं। उदाहरण के लिए, IBM India ने अब ‘स्किल फर्स्ट’ एप्रोच लागू करती है, जहां कॉलेज की डिग्री कोई मायने नहीं रखती है।
नई स्किल्स पर है खासा जोर
आईबीएम की सीएचआरओ निकल Nickle LaMoreaux ने मनीकंट्रोल को बताया, इसका सबसे बड़ा उदाहरण Python है जो डाटा साइंस में तुलनात्मक रूप से नई स्किल है। 20 साल पहले किसी ने इसे डिग्री में हासिल नहीं की होगी।
उन्होंने कहा, “अब, मैं इस बात की परवाह क्यों करूं कि क्या आपने Python की पढ़ाई आईआईटी में की या आपने घर पर रातों को इसे सीखा है। आपके पास सिर्फ एक सही स्किल होनी चाहिए।”
Tech Mahindra, thyssenkrupp Industrial Solutions, Godrej & Boyce (G&B) और Merck सहित कई बड़ी कंपनियां विभिन्न तरह की रणनीतियां अपनाने के लिए तैयार हैं, जहां स्किल और डिग्री दोनों का महत्व है क्योंकि वे भविष्य के लिए टैलेंट को विकसित करना चाहती हैं।
टेक महिंद्रा के ग्लोबल चीफ पीपल ऑफिसर और हेड हर्षवेंद्र सोइन ने मनीकंट्रोल को बताया, हम सभी इमर्जिंग टेक्नोलॉजिस में स्किल बेस्ड हायरिंग पर जोर देते रहे हैं। इसके लिए महामारी के बाद के चुनौतीपूर्ण हालात में डिजिटल फर्स्ट स्ट्रैटजी को अपनाया जा रहा है।
टैलेंट की कमी से जूझ रही हैं भारतीय कंपनियां
थिंकटैंक ओआरएफ के डेटा के मुताबिक, भारत में 33 फीसदी कंपनियों को नई टेक्नोलॉजिस की पेशकश के चलते अतिरिक्त वर्कर्स भर्ती करने की जरूरत है। हालांकि, ManpowerGroup की एक रिपोर्ट से जाहिर होता है कि भारतीय कंपनियों को टैलेंट की कमी से जूझना पड़ रहा है।
G&B ने इंडस्ट्री के साथ प्रतिपर्धी बनाए रखने के उद्देश्य से कर्मचारियों के लिए 510 से ज्यादा बाहरी कोर्सों की रिपॉजिटरी के साथ ही लीडरशिप और फंक्शनल एरियाज में 40 से ज्यादा ट्रेनिंग मॉड्यूल्स डिजाइन किए हैं।