कंस्ट्रक्शन फर्म जयप्रकाश एसोसिएट्स (Jaiprakash Associates) ने 28 फरवरी को लेंडर्स को 2,897 करोड़ रुपये के भुगतान पर डिफॉल्ट यानी चूक की है। कंपनी पर लेंडर्स के 1,544 करोड़ रुपये का ब्याज 1,353 करोड़ रुपये का प्रिसिंपल अमाउंट बकाया है। कंपनी ने शेयर बाजारों को भेजे एक लेटर में यह जानकारी दी है।
जयप्रकाश एसोसिएट्स (JP Associates) को लोन देने वाले लेंडर्स में ICICI बैंक, एक्सिस बैंक, IDBI बैंक, केनरा बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा शामिल है। कुल मिलाकर करीब 32 बैंक ऐसे हैं, जिन्होंने जयप्रकाश एसोसिएट्स को कर्ज दे रखा है। कंपनी ने बताया कि फंड-आधारित वर्किंग कैपिटल की जरूरतों, गैर-फंड आधारिक वर्किंग कैपिटल की जरूरतें, टर्म लोन और FCCB की बाध्यताओं के चलते यह डिफॉल्ट हुआ है।
कंपनी पर लेनदारों का कुल बकाया 27,000 करोड़ रुपये है। सबसे अधिक बकाया ICICI बैंक का है। सिंतबर 2018 में ICICI बैंक ने नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) की इलाहाबाद बेंच के सामने JP एसोसिएट्स के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने के लिए याचिका डाली थी। सभी लेंडर्स, IBC के बाहर लोन को रिस्ट्रक्चर करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन यह अब तक सफल नहीं हुआ है।
सूत्रों के मुताबिक, लेंडर्स इस स्तर पर एनसीएलटी के जरिए समाधान पर जोर दे सकते हैं। एक सीनियर बैंकर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ICICI बैंक की अगुआई में लेंडर्स, IBC के बाहर लोन को रिस्ट्रक्चर करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन रिजर्व बैंक इसमें उत्सुक नहीं था।
बैंकर ने कहा, 'ऐसा लग रहा है कि बैंक NCLT के जरिए समाधान पर जोर दे रहे हैं। यह मामला 2018 में पहली बार याचिका दाखिल किए जाने के बाद से ही चल रहा है और इसमें कई साल हो चुके। इस खाते को बैंकों ने पहले से ही अपनी किताबों में एडजस्ट कर लिया है।"
RBI ने 2017 में बैकों को दिवाला खातों की जो दूसरी लिस्ट भेजी थी, उसमें JP एसोसिएट्स का भी नाम था। इस ग्रुप एक दूसरी कंपनी JP इंफ्राटेक लिमिटेड पहले से ही एनसीएलटी की कार्यवाही से गुजर रही है।