पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (Indian Oil Corporation), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (Hindustan Petroleum Corporation Limited- HPCL), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (Bharat Petroleum Corporation Limited- BPCL) जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के शेयरों में जोश नहीं आया। मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में प्रति लीटर ₹3 की बढ़ोतरी कर खुदरा तेल बेचने वाली कंपनियों को जो राहत दी गई थी, उसका एक बड़ा हिस्सा तो रुपये में तेज गिरावट ही खत्म कर रही है। इन कंपनियों के शेयर ईरान और अमेरिका के बीच की जंग में अब तक करीब 30% टूट चुके हैं। वहीं डॉलर के मुकाबले रुपया 96 के पार जाने से आयात पर खर्च बढ़ने और फ्यूल मार्केटिंग मार्जिन घटने की चिंताएं और बढ़ गई हैं।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी सिर्फ आंशिक राहत
एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर ₹3 की बढ़ोतरी से वित्त वर्ष 2026-27 में OMCs को लगभग ₹52,700 करोड़ की रिकवरी में मदद मिल सकती है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो OMCs का कुल नुकसान फिर भी लगभग ₹3.6 लाख करोड़ रह सकता है। इसका मतलब है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से इनके घाटे का सिर्फ 15% के करीब ही कवर हो पाएगा।
बता दें कि दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के बावजूद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लंबे समय तक कोई बड़ा बदलाव नहीं होने के चलते तेल बेचने वाली कंपनियों का घाटा तेजी से बढ़ा। इस बार जो बढ़ोतरी की गई है, वह लगभग चार साल बाद हुई। कच्चा तेल अमेरिका और ईरान के बीच जंग के चलते 50% से अधिक बढ़ चुका है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत् हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में कहा था कि कच्चे तेल की महंगाई से OMCs को हर दिन लगभग ₹1,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है।
रुपये की कमजोरी ने कैसे खराब किया माहौल?
बाजार के जानकारों के मुताबिक अब सबसे बड़ी चिंता रुपये की तेज गिरावट है। भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है जिनका पेमेंट अमेरिकी डॉलर में होता है। ऐसे में रुपये के कमजोर होने पर कच्चे तेल की कीमत स्थिर रहने पर भी भारतीय कंपनियों के लिए तेल महंगा हो जाता है। एसबीआई रिसर्च के मुताबिक अगर कच्चे तेल की कीमत $106 प्रति बैरल और एवरेज एक्सचेंज रेट ₹94 प्रति डॉलर मानी जाए, तो कच्चे तेल के आयात की लागत लगभग ₹9,964 प्रति बैरल बैठती है। पेट्रोल-डीजल में प्रति लीटर ₹3 की बढ़ोतरी से OMCs को हर बैरल पर लगभग ₹477 का फायदा मिलता है। हालांकि अगर रुपया और कमजोर होकर डॉलर के मुकाबले 96 के करीब पहुंच जाता है, तो उसी कच्चे तेल का आयात रुपये में कहीं अधिक महंगा हो जाएगा। इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से मिलने वाला फायदा लगभग खत्म हो जाएगा।
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं और रुपया दबाव में रहता है, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में मौजूदा बढ़ोतरी OMCs की प्रॉफिटेबिलिटी को पूरी तरह ट्रैक पर नहीं ला पाएगी। शिनहान बैंक इंडिया के ट्रेजरी हेड कुणाल सोधानी का कहना है कि हर लीटर पेट्रोल-डीजल के भाव में ₹3 की बढ़ोतरी OMCs के लिए स्थायी इलाज से अधिक टेंपररी पेनकिलर है। उनका कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और रुपया कमजोर रहता है, तो OMCs को प्रॉफिटेबिलिटी सामान्य करने के लिए आने वाले समय में कुल मिलाकर प्रति लीटर पेट्रोल और डीजल के भाव में ₹10-12 की बढ़ोतरी और करनी पड़ सकती है।
रुपये को लेकर उनका कहना है कि भारत के बढ़ते इंपोर्ट बिल, OMCs से लगातार डॉलर की मांग, वैश्विक जोखिम से बचने की प्रवृत्ति रुपये पर दबाव बनाए रखेगी। उनका मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट नहीं आती है या आरबीआई अधिक आक्रामक हस्तक्षेप नहीं करती है, तब तक डॉलर के मुकाबले रुपया 94.50-97.50 के दायरे में बना रह सकता है और उठा-पटक तेज रह सकती है।
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