जेट एयरवेज (Jet Airways) के लेनदारों ने इस एयरलाइन की संपत्तियों को बेच जाने की मांग की है। लेनदारों ने सुप्रीम कोर्ट में सोमवार 10 जुलाई के कहा कि नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) ने एयरलाइन के लिए जिस रिजॉल्यूशन प्लान को मंजूरी दी थी, वह काम नहीं कर रहा है। लेनदारों की समिति की तरफ से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एन वेंकटरमण ने कोर्ट में कहा, एयरलाइन का मालिकाना हक जालान-कैलरॉक कंसोर्टियम को ट्रांसफर हुई है, लेकिन उसने अभी तक एयरलाइन में एक भी पैसा नहीं लगाया है। उन्होंने कहा कि डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) भी के एयर ऑपरेटर सर्टिफिकेट को रिन्यू करने के लिए तैयार नहीं है, जो मई में समाप्त हो गया था।
वेंकरमण ने कहा कि कंसोर्टियम ने एयरलाइन में निवेश के अपने वादे को पूरा नहीं किया है और वह बार-बार एनसीएलटी से इसके लिए समयसीमा बढ़वा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर लेनदारों को एयरलाइन से अपना बकाया वसूलना है, तो इसके लिए इसकी संपत्तियों को बेचने की इजाजत देने होगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए दो हफ्ते की समयसीमा तय की है और तब तक जलान-कैलरॉक को इस मामले में अपना जवाब सौंपने को कहा है।
किसी कंपनी के दिवालिया घोषित होने के बाद उसे लोन या कर्ज देने वाले संस्थाओं की एक समिति बनाई जाती है, जिसे लेनदारों की समिति कहते हैं। यह कंपनी को कर्ज देने वाली सभी वित्तीय संस्थाओं का प्रतिनिधित्व करने वाली समिति होती है। जिस संस्थान ने दिवालिया हुई कंपनी को जितना अधिक लोन दिया होता है, समिति में उसके पास उतना अधिक मतदान प्रतिशत होता है।
जेट एयरवेज मामले में लेनदारी की समिति की अगुआई भारतीय स्टेट बैंक (SBI) कर रहा है। एयरलाइन पर SBI, पंजाब नेशनल बैंक, IDBI, केनरा बैंक और ICICI बैंक सहित अन्य वित्तीय संस्थाओं का करीब 8,000 करोड़ रुपये बकाया है।
इससे पहले 5 जुलाई को लेनदारों की समिति ने कोर्ट को बताया था कि उसने दिवालिया समाधान प्रक्रिया शुरू होने के बाद से अपने निवेश पर बिना कोई रिटर्न पाए करीब 470 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। लेनदारों ने कहा कि उन्हें हर महीने 23 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
जेट एयरवेज वर्कमेन एसोसिएशन ने भी लेनदारों से सहमति जताई और कोर्ट को बताया कि उन्हें भी उनका बकाया भुगतान नहीं किया गया है। इससे पहले मई 2023 में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने जालान कालरॉक कंसोर्टियम को जेट एयरवेज का अधिग्रहण करने के लिए सफल बोलीदाता के रूप में चुना था।