रिन्यूएबल और थर्मल एनर्जी सेगमेंट में बड़े पैमाने पर निवेश बढ़ा सकता है JSW Group

जेएसडब्ल्यू ग्रुप (JSW Group) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर सज्जन जिंदल के मुताबिक रिन्यूएबल सेक्टर में ग्रोथ की जबरदस्त संभावना है। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से व्यावहारिक विकल्प बनने पर इसकी रफ्तार बढ़ेगी और ग्रुप की योजना आने वाले वर्षों में रिन्यूएबल और थर्मल पावर, दोनों सेगमेंट में पूंजी निवेश बढ़ाने की है

अपडेटेड Dec 02, 2024 पर 9:51 PM
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जेएसडब्ल्यू ग्रुप अभी भी ग्रीन हाइड्रोजन स्पेस की तलाश कर रहा है।

जेएसडब्ल्यू ग्रुप (JSW Group) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर सज्जन जिंदल के मुताबिक रिन्यूएबल सेक्टर में ग्रोथ की जबरदस्त संभावना है। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से व्यावहारिक विकल्प बनने पर इसकी रफ्तार बढ़ेगी और ग्रुप की योजना आने वाले वर्षों में रिन्यूएबल और थर्मल पावर, दोनों सेगमेंट में पूंजी निवेश बढ़ाने की है।

जिंदल ने मनीकंट्रोल से खास बातचीत में कहा, 'हमारा मानना है कि रिन्यूएबल एनर्जी के आर्थिक रूप से व्यावहारिक विकल्प बनने पर यह भारत के ऊर्जा स्रोत का अहम हिस्सा बन जाएगा।' जेएसब्ल्यू एनर्जी का इरादा साल 2030 तक 20 गीगावॉट की उत्पादन क्षमता और 40 गीगावॉट की स्टोरेज क्षमता हासिल करना है। कंपनी की कुल उत्पादन क्षमता फिलहाल 18.2 गीगावॉट है, जिनमें 7.7 गीगावॉट ऑपरेशन में है, जबकि 2.1 गीगावॉट विंड, थर्मल और हाइड्रो सेगमेंट में कंस्ट्रक्शन में है। साथ ही, 8.3 गीगावॉट रिन्यूएबल एनर्जी का मामला पाइपलाइन में है।

जिंदल ने कहा, 'पहले जब थर्मल पावर 4 रुपये प्रति यूनिट था, उस वक्त रिन्यूएबल एनर्जी काफी महंगी थी। हालांकि, अब इसकी दर घटकर 2.5-3 रुपये प्रति यूनिट हो रही है और अब इसमें निवेश करने का मौका है। हम सोलर और विंड में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहे हैं, खास तौर पर राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में।'


ग्रुप अभी भी ग्रीन हाइड्रोजन स्पेस की तलाश कर रहा है और इसकी परफॉर्मेंस का पता लगाने के लिए 25 मेगावॉट का प्लांट स्थापित कर रहा है। जिंदल ने कहा, 'हाइड्रोजन के सस्ता (2 डॉलर प्रति किलो से कम) होने पर हम इसमें ज्यादा आक्रामक तरीके से निवेश करेंगे।' जेएसडब्ल्यू एनर्जी के सीईओ शरद महेंद्र ने इस साल जून में मनीकंट्रोल को बताया था कि कंपनी द्वारा मौजूदा फिस्कल ईयर की चौथी तिमाही में कंपनी ग्रीन हाइड्रोजन का पायलट प्रोजेक्ट चालू किए जाने की उम्मीद है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत रिन्यूएबल इलेक्ट्रिसिटी की क्षमता 3,800 टन सालाना है।

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