NCLT किराए पर विमान देने वाली कंपनी BOC Aviation (Ireland) की याचिका पर 29 मई को सुनवाई करेगा। कंपनी ने याचिका में Go First को किराए पर दिए गए विमानों को वापस करने की मांग की है। किराए पर विमान देने वाली कंपनी को Lessor कहा जाता है। इससे पहले NCLAT ने 22 मई के आदेश में गो फर्स्ट की इनसॉल्वेंसी की याचिका को सही माना था।
NCLT ने गो फर्स्ट के इनसॉल्वेंसी में जाने से पहले खत्म हो चुके लीज एग्रीमेंट की जांच के लिए lessors को NCLT याचिका देने का निर्देश दिया था। अपेलेट ट्राइब्यूनल ने मामले से संबंधित एयरक्राफ्ट को लेकर दोनों पक्षों के दावों को लेकर अंतरिम रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (IRP) को एनसीएलटी में एक अप्लिकेशन डालने की इजाजत दी थी।
इनसॉल्वेंसी प्रोसिडिंग्स का विरोध कर रही लेजर्स
NCLAT ने NCLT को उसके (NCLAT) किसी ऑब्जर्वेशंस के प्रभाव में आए बगैर lessors और IRP के अप्लिकेशंस पर फैसला देने के कहा था। कई lessors ने इनसॉल्वेंसी के गो फर्स्ट के कदम का विरोध किया है। उन्होंने इनसॉ्ल्वेंसी अप्लिकेशन को एडमिट करने के NCLT के फैसले को चुनौती दी है। इनमें SMBC aviation capital, SFV Aircraft Holdings और GY Aviation Lease शामिल हैं। लेजर्स ने NCLAT में दलील दी है कि गो फर्स्ट उन विमानों को अपने पास रखने के लिए इनसॉल्वेंसी प्रोसिडिंग्स का इस्तेमाल कर रही है, जो उसके नहीं हैं।
NCLT ने 10 मई को याचिका मंजूर कर ली थी
NCLT की दिल्ली बेंच ने 10 मई को इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस शुरू करने के लिए गो फर्स्ट की याचिका मंजूर कर ली थी। ट्राइब्यूनल ने कंपनी को बोर्ड को निलंबित करते हुए एक IRP नियुक्त कर दिया था। उसने गो फर्स्ट के कर्ज पर भी मोरेटोरियम लगा दिया था।
गोफर्स्ट पर 11,000 करोड़ रुपये की लायबिलिटी
गो फर्स्ट की शुरुआत मशहूर उद्योगपति नुसली वाडिया ने की थी। पहले इसका नाम GoAir था। इसने 2 मई को इनसॉल्वेंसी के लिए याचिका दी थी। इसने अपनी खराब आर्थिक स्थिति के लिए अमेरिकी एयरक्राफ्ट कंपनी Pratt & Whitney (P&W) को जिम्मेदार बताया था। उसने कहा था कि कंपनी के इंजन की सप्लाई नहीं करने की वजह से उसके आधे से ज्यादा विमानों का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। गो फर्स्ट पर करीब 11,000 करोड़ रुपये की लायबिलिटी है।