Oyo ESOP : ऑनलाइन होटल एग्रीगेटर ओयो के इम्प्लॉयी स्टॉक ऑप्शन पर खर्च 344 फीसदी बढ़कर वित्त वर्ष 22 में 680 करोड़ रुपये हो गया, जबकि वित्त वर्ष 21 में यह 153 करोड़ रुपये रहा था। खास बात यह है कि ऐसा उस दौर में हुआ है, जब कंपनी ने अपनी सैलरी और बोनस खर्च में कासी कटौती की है। मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) में दी फाइलिंग में यह बात सामने आई है।
रितेश अग्रवाल को मिला कितना वेतन
जून तिमाही में Oyo का शेयर बेस्ड पेमेंट खर्च 260 करोड़ रुपये रहा था। कंपनी ने हाल में सेबी में दी फाइलिंग में कहा कि ओयो के फाउंडर और सीईओ रितेश अग्रवाल ( Ritesh Agarwal) को वित्त वर्ष 22 में 5.6 करोड़ रुपये वेतन मिला, जो वित्त वर्ष 21 के 1.6 करोड़ रुपये से 250 फीसदी ज्यादा था। वित्त वर्ष 20 के लिए उनका कम्पंसेशन 21.50 लाख रुपये रहा था।
सैलरी, वेज पर घटा कंपनी का खर्च
ESOP costs में भारी बढ़ोतरी के बावजूद, होटल एग्रीगेटर कंपनी के कर्मचारियों की लागत वित्त वर्ष 22 में सिर्फ 7 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 1,862 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गई, क्योंकि सैलरी, वेज और बोनस के मद में खर्च 27 फीसदी घटकर 1,117 करोड़ रुपये रह गए। वहीं वित्त वर्ष 21 में ये खर्च 1,520 करोड़ रुपये के स्तर पर थे।
वित्त वर्ष 22 में हुआ कितना घाटा
मनीकंट्रोल की पूर्व की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 22 में ओयो का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 18 फीसदी बढ़कर 4,905 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। वहीं उसका कुल घाटा 45 फीसदी घटकर 1,851 करोड़ रुपये रह गया। स्टार्टअप ने एक अन्य फाइलिंग में मार्केट रेगुलेटर को यह जानकारी दी थी।
सॉफ्टबैंक के निवेश वाली कंपनी अभी भी कोविड से पहले के सालाना रेवेन्यू से खासी पीछे है। वित्त वर्ष 20 में कंपनी का रेवेन्यू 13413 करोड़ रुपये रहा था। उसे कोरोना महामारी से पहले कुल 10,419 करोड़ रुपये का घाटा हो चुका था।