Pershing Square Capital Management के सीईओ Bill Ackman ने एक बयान दिया है, जो डर पैदा करता है। यह बयान सिलिकॉन वैली बैंक (Silicon Valley Bank) के ध्वस्त हो जाने के बाद आया है। Ackman ने कुछ और बैंकों के डूबने की आशंका जताई है। उन्होंने कहा है कि अमरिकी अथॉरिटीज के हस्तक्षेप के बावजूद कुछ और बैंकों के डूबने की आशंका है। हालांकि, अमेरिकी अथॉरिटीज सिलिकॉन वैली क्राइसिस के बाद बैंकिंग सिस्टम में इनवेस्टर्स का भरोसा बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं। अमेरिकी रेगुलेटर्स ने 10 मार्च को SVB को बंद करने का ऐलान किया था।
अमेरिकी सरकार को मदद के लिए आगे आना चाहिए
Ackman ने सिलिकॉन वैली बैंक के लिए अमेरिकी सरकार की मदद की मांग की। इससे पहले उन्होंने कहा था कि सरकार को इकोनॉमिक क्राइसिस को बढ़ने से रोकने के लिए बैंक के डिपॉजिटर्स के हितों की सुरक्षा करनी चाहिए। उन्होंने इस बारे में एक ट्वीट किया है। इसमें कहा है, "यह बेलआउट नहीं था। GFC के समय सरकार बैंक्स में प्रेफर्ड स्टॉक्स के रूप में टैक्सपेयर्स के पैसे लगाए थे। बॉन्डहोल्डर्स को सुरक्षा दी गई। टैक्सपेयर्स के पैसे को रिस्क में डाल दिया गया।"
सरकारी हस्तक्षेप के बावजूद और बैंक डूब सकते हैं
न्होंने कहा कि सरकारी अथॉरिटीज के हस्तक्षेप के बावजूद और बैंक डूब सकते हैं। लेकिन अब हमारे पास एक क्लियर रोडमैप है कि सरकार किस तरह हालात से निपटेगी। बैंकों के बोर्ड्स और मैनेजमेंट्स के लिए यह एक बड़ा सबक है। किसी ऐसे बैंक का डायरेक्टर और CEO होना, जो डूब जाता है छोटी बात नहीं है। इसके बाद लंबी कानूनी लड़ाई चलती है। रेगुलेटरी जांच होती हैं। व्यक्तिगत लायबिलिटी फिक्स की जाती है। सिविल और क्रिमिनल चार्जेज भी लगने की आशंका होती है। और इमेज को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचता है।
2008 जैसी क्राइसिस नहीं आएगी
अमेरिकी में सिलिकॉन वैली बैंक के डूबने से फाइनेंशियल सिस्टम को बड़ा झटका लगा है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे 2008 जैसी फाइनेंशियल क्राइसिस की आशंका नहीं है, लेकिन वित्तीय व्यवस्था को लेकर कई सवाल पूछे जा रहे हैं। निवेशकों और बॉन्डहोल्डर्स के अलावा उन कंपनियों को बड़ा झटका लगा है, जिन्होंने अपने पैसे सिलिकन वैली बैंक में डिपॉजिट किए थे। बताया जा रहा है कि कुछ कंपनियों को तो अगले महीने अपने एंप्लॉयीज को सैलरी तक देने के लिए पैसे नहीं हैं।