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IndiGo के बोर्ड से राकेश गंगवाल क्यों निकले, क्या वह राकेश झुनझुनवाला के Akasa में निवेश करेंगे?

राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल के बीच जिस एक चीज को लेकर समझौता नहीं हो पाया था वह IndiGo के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (AoA) की एक क्लाउज था, जानिए क्या थी ये शर्त

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 22, 2022 पर 10:06 AM
IndiGo के बोर्ड से राकेश गंगवाल क्यों निकले, क्या वह राकेश झुनझुनवाला के Akasa में निवेश करेंगे?
राकेश गंगवाल इस बात से नाराज थे कि IndiGo उन लेनदेन उन कंपनियों के साथ है जो भाटिया के IGE ग्रुप से जुड़ी हैं

BINOY PRABHAKAR

तीन साल पहले राकेश गंगवाल ने ज़ोर देकर कहा था कि वह IndiGo में अपनी हिस्सेदारी नहीं बेचेंगे। मौजूदा प्राइस पर उनकी हिस्सेदारी की वैल्यू तकरीबन 30,000 करोड़ रुपए होती है। राकेश गंगवाल ने को-फाउंडर राहुल भाटिया के साथ मिलकर IndiGo की शुरुआत की थी। हालांकि बाद के साल में राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल में मतभेद बढ़ गया। इसी के साथ इस बात के आसार भी बढ़ गए कि गंगवाल अपनी हिस्सेदारी बेचकर कंपनी से अलग हो सकते हैं।

पिछले शुक्रवार 18 फरवरी को इंटरग्लोब एविएशन (InterGlobe Aviation) ने गंगवाल का लिखा एक लेटर सार्वजनिक करते हुए बताया कि वह डायरेक्टर का पद छोड़ रहे हैं और अगले 5 साल में अपनी हिस्सेदारी भी कम करेंगे। इंटरग्लोब एविएशन ही IndiGo का कामकाज देखती है। आखिर इन तीन सालों में ऐसा क्या बदला कि गंगवाल को कंपनी छोड़नी पड़ी? पिछले कुछ सालों के दौरान प्रमोटर्स के बीच जो तनातनी रही उसके आधार पर ऐसा होना तय था।

राकेश गंगवाल के IndiGo छोड़ने के क्या मायने हैं? क्या प्रमोटर्स के बीच का मतभेद सही मायने में खत्म हो चुका है? अगर आप ये सोच रहे हैं कि गंगवाल ने यह कदम क्यों उठाय तो इसकी कुछ वजहों पर आप गौर कर सकते हैं। हालांकि राकेश गंगवाल और राहुल भाटिया से इस खबर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है।

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