रिलायंस रिटेल ने (Reliance Retail) ने गुरुवार 29 दिसंबर को बताया कि वह लोटस चॉकलेट कंपनी लिमिटेड (Lotus Chocolate Company Ltd) की 51 फीसदी बहुमत हिस्सेदारी का अधिग्रहण करेगी। कंपनी ने बताया इस हिस्सेदारी का अधिग्रहण उसकी पूर्व स्वामित्व वाली सब्सिडियरी कंपनी रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (RCPL) करेगी। इसके अलावा RCPL, लोटस चॉकलेट की अतिरिक्त 26% हिस्सेदारी खरीदने के लिए एक ओपन ऑफर भी लाएगी। बता दें कि रिलायंस रिटेल, रिलायंस इंडस्ट्रीज की रिटेल इकाई है। रिलायंस रिटेल की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, रिलायंस कंज्यूमर 113 रुपये के औसत भाव पर लोटस चॉकलेट कंपनी के 6.5 लाख शेयर खरीदेगी और इस तरह इसकी कुल वैल्यू 74 करोड़ रुपये होगी।
इसके अलावा रिलायंस की सब्सिडियरी और लोटस के प्रमोटर ग्रुप की कुछ कंपनियां 10 रुपये के फेस वैल्यू वाले 5 करोड़ से अधिक नॉन-क्युम्युलेटिव रिडीमेबल प्रेफरेंस शेयरों को सब्सक्राइब करेंगे।
साथ ही RCPL पब्लिक शेयरधारकों से लोटस चॉकलेट के अतिरिक्त 33,38,673 शेयर या 26 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए एक ओपन आफर लाएगी। रिलायंस रिटेल ने बयान में कहा, "दोनों पार्टियों ने कुछ परस्पर अधिकारों और दायित्वों का निर्देश देने वाले एक शेयरहोल्डर्स एग्रीमेंट भी किया है।"
कंपनी ने यह भी बताया कि RCPL की ओर से लगाई गई पूंजी "लोटस के विकास और विस्तार में मदद करेगी। साथ ही उसके कन्फेक्शनरी, कोको, चॉकलेट के कई तरह के प्रोडकक्ट आदि के बड़े निर्माता के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी।"
रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड की एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर ईशा अंबानी (Isha Ambani) ने इस मौके पर कहा, “लोटस में हमारा निवेश देश में ही बनने वाले रोजाना उपभोग के उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दिखाता है, जिससे किफायती कीमत पर एक व्यापक ग्राहक वर्ग की सेवा की जा सके। हम लोटस की बेहद अनुभवी मैनेजमेंट टीम के साथ काम करने को उत्सुक हैं। हम इस बिजनेस को और बढ़ाएंगे और ग्रोथ के अगले चरण में लेकर जाएंगे।"
लोटस कंपनी, कोको और चॉकलेट उत्पादों की सप्लाई करने वाली एक बिजनेस पार्टनर है, जो कोको बीन्स की सोर्सिंग से लेकर कोको बीन्स की प्रॉसेसिंग और चॉकलेट की डिलीवरी तक की सेवाएं मुहैया कराती है। इसके प्रोडक्ट दुनिया भर में चॉकलेट बनाने वाली इकाइयों और चॉकलेट यूजर्स को सप्लाई किए जाते हैं। इसमें स्थानीय बेकरी से लेकर मल्टी-नेशनल कंपनियां तक शामिल हैं।
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