सिंडिकेट बैंक को 2158 करोड़ रु का घाटा

सिंडिकेट बैंक के मुताबिक 3 ब्रांच में घोटाले के कारण 883 करोड़ रुपये का अतिरिक्त घाटा हुआ है।

अपडेटेड May 17, 2016 पर 3:17 PM
     
     
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    वित्त वर्ष 2016 की चौथी तिमाही में सिंडिकेट बैंक को 2158 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। वित्त वर्ष 2015 की चौथी तिमाही में सिंडिकेट बैंक को 417 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था।

    वित्त वर्ष 2016 की चौथी तिमाही में सिंडिकेट बैंक की ब्याज आय 2.7 फीसदी बढ़कर 1462 करोड़ रुपये पर पहुंच गई है। वित्त वर्ष 2015 की चौथी तिमाही में सिंडिकेट बैंक की ब्याज आय 1423 करोड़ रुपये रही थी।

    तिमाही दर तिमाही आधार पर जनवरी-मार्च तिमाही में सिंडिकेट बैंक का ग्रॉस एनपीए 4.61 फीसदी से बढ़कर 6.7 फीसदी रहा है। तिमाही आधार पर जनवरी-मार्च तिमाही में सिंडिकेट बैंक का नेट एनपीए 3.04 फीसदी से बढ़कर 4.48 फीसदी रहा है।

    रुपये में एनपीए पर नजर डालें तो तिमाही आधार पर जनवरी-मार्च तिमाही में सिंडिकेट बैंक का ग्रॉस एनपीए 9603 करोड़ रुपये से बढ़कर 13832 करोड़ रुपये रहा है। तिमाही आधार पर जनवरी-मार्च तिमाही में रुपये में सिंडिकेट बैंक का नेट एनपीए 6210 करोड़ रुपये से बढ़कर 9015 करोड़ रुपये रहा है।

    तिमाही आधार पर जनवरी-मार्च तिमाही में सिंडिकेट बैंक की प्रोविजनिंग 875 करोड़ रुपये से बढ़कर 2412 करोड़ रुपये रही है। तिमाही आधार पर जनवरी-मार्च तिमाही में सिंडिकेट बैंक को 69 करोड़ रुपये के टैक्स खर्च के मुकाबले 121 करोड़ रुपये का टैक्स राइट-बैक मिला है।

    सिंडिकेट बैंक के मुताबिक 3 ब्रांच में घोटाले के कारण 883 करोड़ रुपये का अतिरिक्त घाटा हुआ है। साल दर साल आधार पर जनवरी-मार्च तिमाही में घरेलू कारोबार का नेट इंटरेस्ट मार्जिन 2.6 फीसदी से घटकर 2.5 फीसदी रहा है। सालाना आधार पर जनवरी-मार्च तिमाही में ग्लोबल कारोबार का नेट इंटरेस्ट मार्जिन 2.29 फीसदी से घटकर 2.14 फीसदी रहा है।


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