Tata Sons के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने एयर इंडिया के एंप्लॉयीज का बढ़ाया हौसला, कहा-एयरलाइंस मुश्किल वक्त से गुजर रही

टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने एयर इंडिया ग्रुप के हेडक्वार्टर में एंप्लॉयीज के साथ एक मीटिंग की। इसमें उन्होंने कहा कि एयर इंडिया के एंप्लॉयीज ने एक बड़े तूफान का बड़ी दृढ़ता के साथ सामना किया है। हमें इसी तरह के जज्बे को आगे भी बनाए रखना चाहिए

अपडेटेड Apr 11, 2026 पर 3:22 PM
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एयर इंडिया के रेवेन्यू पर बाहरी झटकों का बड़ा असर पड़ा है।

टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने 10 अप्रैल को एयर इंडिया के एंप्लॉयीज को एक बड़ा मैसेज दिया। उन्होंने कहा कि एयरलाइंस अभी 'मुश्किल वक्त' से गुजर रही है। उसे बड़े लॉस से बाहर आना है और ऑपरेशन से जुड़ी विफलताओं को दूर करना है। एयर इंडिया पहले सरकारी एयरलाइंस कंपनी थी, जिसका कुछ साल पहले टाटा समूह ने अधिग्रहण किया था।

चेयरमैन ने गुरुग्राम में एंप्लॉयीज के साथ मीटिंग की

चंद्रशेखरन ने गुरुग्राम में एयर इंडिया ग्रुप के हेडक्वार्टर में एंप्लॉयीज के साथ एक मीटिंग की। इसमें उन्होंने कहा, "एयर इंडिया के एंप्लॉयीज ने एक बड़े तूफान का बड़ी दृढ़ता के साथ सामना किया है। हमें इसी तरह के जज्बे को आगे भी बनाए रखना चाहिए।" उन्होंने कहा कि हमारा भविष्य उज्ज्वल है। हमने अपने लक्ष्य के लिए एक मजबूत बुनियाद बनाई है। हम अभी मुश्किल वक्त से गुजर रहे हैं। इसका असर एयरलाइंस इंडस्ट्री पर स्पष्ट दिख रहा है।


एयर इंडिया को बड़े नुकसान का अनुमान 

एयर इंडिया के एंप्लॉयीज के साथ चंद्रशेखरन की मीटिंग ऐसे वक्त हुई, जब यह एयलाइंस एक मुश्किल मोड़ पर है। यह किसी वित्त वर्ष में अब तक का सबसे ज्यादा लॉस दिखाने जा रही है। उधर, कंपनी के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने हाल में इस्तीफा दे दिया। एयरलाइंस की रिकवरी पर इंटिग्रेशन कॉस्ट का असर पड़ा है। विस्तारा का विलय इस एयरलाइंस में हुआ। उसके बाद कंपनी को भरोसे से जुड़े मसले का भी सामना करना पड़ा। हालांकि, कंपनी ने अपने जहाजों के बेड़े का काफी विस्तार किया है।

एंप्लॉयीज को एग्जिक्यूशन पर फोकस करने की सलाह

टाटा संस के चेयरमैन ने कहा, "अभी सबसे अहम हमारे लिए एग्जिक्यूशन पर फोकस बनाए रखना है। हमारा फोकस उन चीजों पर होना चाहिए, जो हमारे नियंत्रण में हैं। जहां हम बेहतर कर सकते हैं। हमें कॉस्ट के मामले में सावधानी बरतनी होगी और वास्तविकता को ध्यान में रखकर काम करना होगा।" एक समय एयर इंडिया देश की सबसे बड़ी एयरलाइंस थी। लेकिन, धीरे-धीरे इसकी बाजार हिस्सेदारी घटती गई।

एयर इंडिया को कई बाहरी झटकों का सामना करना पड़ा है

एयर इंडिया के रेवेन्यू पर बाहरी झटकों का बड़ा असर पड़ा है। पिछले साल अहमदाबाद में एयरलाइंस का एक बड़ा जहाज हादसे का शिकार हो गया। उसके बाद फ्यूल की कीमतों में उछाल ने दबाव बढ़ाया है। पाकिस्तानी एयरस्पेस से भी एयरलाइंस की ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ी है। मध्यपूर्व में टेंशन ने दिक्कत और बढ़ा दी है। एयरलाइंस को अपने कई जहाजों के रूट में बदलाव करने पड़े हैं। कंपनी की अमेरिका और यूरोपीय की फ्लाइट्स पर भी असर पड़ा है।

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टाटा संस का सपोर्ट एयर इंडिया को मिलता रहेगा

चंद्रशेखरन ने कहा गुरुग्राम में एंप्लॉयीज के साथ मीटिंग में कहा, "टाटा समूह एयर इंडिया ग्रुप को लेकर प्रतिबद्ध है। बोर्ड पूरी तरह से सपोर्ट करने के लिए तैयार है। हम मैनेजमेंट टीम के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार हैं।" टाटा ग्रुप की कंपनियों पर टाटा संस का कंट्रोल है।

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