Tata Sons को AirAsia India के लॉस को राइट-ऑफ करना पड़ सकता है: रिपोर्ट

CCI ने इस साल जून में एयर इंडिया को एयरएशिया के शेयर कैपिटल के अधिग्रहण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। AirAsia India में टाटा संस की 83.67 फीसदी हिस्सेदारी है

अपडेटेड Aug 24, 2022 पर 12:58 PM
एयरएशिया इंडिया पहले से लॉस में चल रही थी। कोविड-18 की महामारी ने इसकी मुश्किलें और बढ़ा दी।

Tata Sons एयरलाइंस कंपनी AirAsia India के कुल 2,600 करोड़ रुपये के लॉस के लिए प्रोविजनिंग कर सकती है। ईटी नाउ ने यह खबर दी है। टाटा समूह की एयरलाइंस कंपनी Air India ने AirAsia India के इक्विटी शेयर कैपिटल का अधिग्रहण कर लिया है।

CCI ने इस साल जून में एयर इंडिया को एयरएशिया के शेयर कैपिटल के अधिग्रहण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। AirAsia India में टाटा संस की 83.67 फीसदी हिस्सेदारी है। बाकी हिस्सेदारी एयरएशिया इनवेस्टमेंट लिमिटेड की है। एयरएशिया इंडिया सस्ती हवाई सेवाएं देने वाली एयरलाइंस कंपनी है।

अधिकारियों ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया कि एयरएशिया इंडिया पहले से लॉस में चल रही थी। कोविड-18 की महामारी ने इसकी मुश्किलें और बढ़ा दी। अधिकारियों ने बताया कि अभी यह फैसला नहीं हुआ है कि राइट-ऑफ टाटा संस और एयर इंडिया में से किसकी बैलेंसशीट में शामिल किया जाएगा।


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ग्लोबल टैक्स प्रैक्टिस ग्रुप KNAV के पार्टनर उदय वेद ने ईटी नाउ को बताया, "अकाउंटिंग स्टैंडर्ड के मुताबिक, दो ग्रुप कंपनियों के विलय में-एयरएशिया इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस-अगर एक ग्रुप कंपनी की लायबिलिटी उसके एसेट्स से ज्यादा हो जाती है तो ग्रुप को इसके स्थायी होने की स्थिति में इनवेस्टमेंट की वैल्यू में इम्पेयरमेंट के लिए प्रोविजन करना पड़ता है।"

उन्होंने कहा, "एयरएशिया इंडिया के विलय के मामले में अगर एडिशनल इम्पेयरमेंट प्रोविजंस होता है तो उसे टाटां संस के लेटेस्ट रिपोर्टेड स्टैंडएलोन फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में शामिल नहीं किए गए इम्पेयरमेंट प्रोविजंस तक सीमित रखना होगा।"

मामले की जानकारी रखने वाले एक टॉप एग्जिक्यूटिव ने ईटी नाउ को बताया, "टाटा ग्रुप ने एयर इंडिया एक्सप्रेस में एयरएशिया इंडिया के विलय पर काम शुरू कर दिया है।"

ऑडिट एंड अकाउंटिंग फर्म ZADN & Associates के फाउंडर जुल्फिकार शिवजी ने कहा कि अगर लायबिलिटीज सहित एयरएशिया इंडिया का अकाउंट्स पहले ही टाटा संस के साथ कंसॉलिडेट हो चुका है तो फिर इनवेस्टमेंट के इम्पेयरमेंट टेस्टिंग को छोड़ किसी और प्रोविजनिंग की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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