क्या आप ज्यादा ऑनलाइन खरीदारी (Online Shopping) करते हैं? अगर हां तो 1 जुलाई से हर खरीदारी पर आपको अपने डेबिट कार्ड (Debit Card) या क्रेडिट कार्ड (Credit Card) की डिटेल देनी होगी। इसकी वजह RBI का एक ऑर्डर है। केंद्रीय बैंक ने सभी पेमेंट एग्रीगेटर्स, गेटवेज और मर्चेंट्स को एक जुलाई से ग्राहकों के क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड की डिटेल अपने प्लेटफॉर्म पर स्टोर नहीं करने को कहा है।
पेमेंट एग्रीगेटर्स और मर्चेंट्स परेशान हैं, क्योंकि इस नियम के लागू होने में ज्यादा वक्त नहीं बचा है। उनकी चिंता इस बात को लेकर है कि 1 जुलाई से पहले अल्टरनेटिव सिस्टम तैयार करना मुमकिन नहीं है। अभी पेमेंट एग्रीगेटर्स, पेमेंट गेटवेज और मर्चेंट्स अपने प्लेटफॉर्म पर कस्टमर के कार्ड की डिटेल स्टोर करते हैं। इससे हर बार कस्टमर को ट्रांजेक्शन के वक्त अपने कार्ड की डिटेल डालने की जरूरत नहीं पड़ती है।
आरबीआई पहले दो बार इस नियम को लागू करने की डेडलाइन बढ़ा चुका है। आखिरी बार उसने 23 दिसंबर को यह डेडलाइन छह महीने के लिए बढ़ाई थी। 1 जुलाई से हर खरीदारी पर आपको अपने कार्ड का 16 डिजिट का नंबर, एक्सपायरी डेट और कार्ड वेरिफिकेशन वैल्यू (CVV) डालना होगा।
वीजा, मास्टरकार्ड और रूपे जैसी पेमेंट कंपनियां अल्टरनेटिव सिस्टम बनाने की कोशिश कर रही हैं। एक अल्टरनेटिव 'कार्ड ऑन फाइल टोकेनाइजेशन' (CoFT) है। इस सिस्टम में कार्ड की डिटेल की जगह 'टोकन' का इस्तेमाल होता है। यह हर डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड मर्चेंट प्लेटफॉर्म के लिए यूनिक (अलग) होगा।
मर्चेंट पेमेंट्स अलायंस ऑफ इंडिया (MPAI) ने कहा है कि अभी हर तरह के ट्रांजेक्शन के लिए CoFT का सिस्टम तैयार नहीं हुआ है। MPAI ने नेटफ्लिक्स, डिजनी प्लस हॉटस्टार, जूम, माइक्रोसॉफ्ट और पॉलिसीबाजार शामिल हैं। इस अलायंस ने इस बारे में RBI को अपनी परेशानी बताई है। इसने कहा है कि जब तक दूसरी व्यवस्था तैयार नहीं हो जाती, सभी प्लेटफॉर्म्स से कस्टमर के कार्ड के डेटा डिलीट करने से बहुत दिक्कत होगी। इसका असर मर्टेंट्स के रेवेन्यू पर भी पड़ेगा।
आईफोन जैसे प्रोडक्ट्स बनाने वाली एपल ने इंडिया में अपने कस्टमर्स से कहा है कि वह क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड से पेमेंट एक्सेप्ट नहीं करेगी। उसने कस्टमर्स को पेमेंट के लिए नेटबैंकिंग, UPI या एपल आईडी बैलेंस का इस्तेमाल करने की सलाह दी है।