क्या Zomato डूब रही है? CEO दीपिंदर गोयल ने वायरल दावे का दिया जवाब

क्या Zomato वाकई संकट में है? CEO दीपिंदर गोयल ने वायरल आरोपों पर चुप्पी तोड़ी, अंदरूनी कलह और बाजार हिस्सेदारी घटने के दावों को सिरे से खारिज किया। क्या हकीकत कुछ और है?

अपडेटेड Apr 26, 2025 पर 5:17 PM
एक वायरल रेडिट पोस्ट में आरोप लगाया गया कि जोमैटो अपने डिलीवरी पार्टनर्स को अन्य कंपनियों की तुलना में कम पैसे दे रही है।

ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो (Zomato) के CEO दीपिंदर गोयल ने सोशल मीडिया पर कंपनी के खिलाफ वायरल हो रहे आरोपों को 'पूरी तरह बकवास' करार दिया है। गोयल ने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए स्पष्ट किया कि कंपनी न तो बाजार में अपनी हिस्सेदारी गंवा रही है और न ही अपने कर्मचारियों को सिर्फ जोमैटो से ऑर्डर करने के लिए बाध्य कर रही है।

गोयल ने कहा, 'यह स्पष्टीकरण देना भी शर्मनाक है, लेकिन चूंकि कई लोगों ने मुझसे चिंता जताई, इसलिए जरूरी लगा।'

जोमैटो पर क्या आरोप लगे हैं?


यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब 25 अप्रैल को एक रेडिट (Reddit) पोस्ट सामने आया। इसमें एक यूजर ने दावा किया कि जोमैटो की आंतरिक स्थिति खराब हो गई है और यह अब पटरी से उतर (off the rails) गई है। उसने लिखा कि कंपनी के नेतृत्व ने स्वीकार किया है कि जोमैटो अपनी बाजार हिस्सेदारी स्विगी (Swiggy) और जेप्टो कैफे (Zepto Cafe) जैसे प्रतिस्पर्धियों को खो रही है।

पोस्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि कर्मचारियों को हर महीने कम से कम सात बार जोमैटो से ऑर्डर करना अनिवार्य किया गया है। उनके लिए प्रतिस्पर्धी ऐप्स के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी गई है।

रेडिट पोस्ट में जोमैटो के वर्क कल्चर को 'जहरीला' बताया गया। इसमें दावा किया गया है कि ऑफिस पॉलिटिक्स, माइक्रोमैनेजमेंट और सार्वजनिक रूप से कर्मचारियों को नीचा दिखाना अब सामान्य हो गया है। नेतृत्व में बार-बार बदलाव के कारण कर्मचारियों में असुरक्षा और घबराहट का माहौल बना हुआ है।

डिलीवरी मॉडल पर सवाल

रेडिट पोस्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि जोमैटो अपने डिलीवरी पार्टनर्स को अन्य कंपनियों की तुलना में कम पैसे दे रही है। इसके चलते बड़ी संख्या में डिलीवरी पार्टनर स्विगी और अन्य प्लेटफॉर्म्स की ओर पलायन कर रहे हैं।

यूजर के मुताबिक, जोमैटो से ऑर्डर पर धोखाधड़ी के मामले बढ़ रहे हैं। जैसे कि डिलीवरी एजेंट ऑर्डर पिक करके गायब हो जाते हैं। इसके कारण रेस्तरां बंद न होने के बावजूद ऑर्डर उपलब्ध नहीं रहते। इससे ग्राहक, डिलीवरी एजेंट और रेस्तरां पार्टनर सभी नाराज हो रहे हैं।

दीपिंदर गोयल ने क्या जवाब दिया?

दीपिंदर गोयल ने अपने पोस्ट में दो टूक कहा कि जोमैटो अपने कर्मचारियों की 'फ्रीडम ऑफ चॉइस' का समर्थन करती है। उन्होंने बाजार हिस्सेदारी गंवाने और कर्मचारियों से जबरन ऑर्डर करने जैसे आरोपों को भी खारिज किया। गोयल ने लिखा, "ना तो हम बाजार हिस्सेदारी खो रहे हैं, और ना ही कभी कर्मचारियों पर दबाव डालेंगे।"

फिलहाल जोमैटो के सीईओ दीपिंदर गोयल ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वायरल पोस्ट के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई की जाएगी या नहीं।

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