Kargil Vijay Diwas: खराब मौसम के चलते राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का लद्दाख दौरा रद्द

साल 2019 में भी खराब मौसम की वजह से राष्ट्रपति को कारगिल विजय दिवस में हिस्सा लेने के लिए द्रास जाने से रोक दिया गया था

अपडेटेड Jul 26, 2021 पर 1:00 PM
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Kargil Vijay Diwas: देश आज कारगिल विजय दिवस की 22वीं सालगिरह मना रहा है। इस मौके पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन सभू को श्रद्धांजलि दी है, जिन्होंने देश की रक्षा करते हुए कारगिल में अपनी जान गंवाई है।

देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद कारगिल विजय दिवस की 22 वीं सालगिरह पर भारतीय सशस्त्र बल (Indian armed forces) को श्रद्धांजलि देने के लिए द्रास जाना था, जिसे खराब मौसम की वजह से रद्द कर दिया गया है। इस बात की जानकारी आला अधिकारियों ने दी है।

रामनाथ कोविंद खुद द्रास में करगिल वॉर मेमोरियल पर वीरगति को प्राप्त हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि देने वाले थे। लेकिन अब उनका ये कार्यक्रम रद्द हो गया है। राष्ट्रपति कोविंद रविवार को श्रीनगर पहुंच गए थे।

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भारतीय सेना के अधिकारियों (Indian army officials) ने बताया कि राष्ट्रपति अब बारामुला युद्ध स्मारक (Baramula War Memorial) पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। साल 2019 में भी खराब मौसम की वजह से राष्ट्रपति को कारगिल विजय दिवस में भाग लेने के लिए द्रास जाने से रोक दिया गया था। इसकी जगह उन्होंने बादामीबाग में सेना के 15 कोर हडक्वाटर में एक युद्ध स्मारक पर मल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी।

राष्ट्रपति कोविंद मंगलावर को श्रीनगर में कश्मीर विश्वविद्यालय के 19वें दीक्षांत समारोह को भी संबोधित करने वाले हैं। राष्ट्रपति की यात्रा के लिए सुरक्षा के उपायों के तहत, राजभवन की ओर जाने वाले दो रास्तों पर रविवार और बुधवार को डायवर्ट कर दिया गया है और इसके आसपास के इलाकों को सील कर दिया गया है।


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बता दें,  1999 में करगिल की ऊंची चोटियों पर भारत और पाकिस्तान के बीच जंग हुई थी। जिसमें भारत की विजय हुई थी। उस युद्ध की विजय के उपलक्ष्य में हर साल कारगिल के द्रास स्थित वॉर मेमोरियल पर कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है।

1999 में पाकिस्तानी सेना ने भारत की इन चोटियों पर कब्जा कर लिया था। 14 से 18 हजार फीट की उंचाई पर स्थित इन चोटियों से भारतीय सेना ने बेहद ही बहादुरी के साथ पाकिस्तानी घुसपैठियों को मार भगाया था। इस युद्ध में भारत के 500 सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए थे। ये युद्ध मिलिट्री-हिस्ट्री में एक बेहद ही मुश्किल और जोखिम-भरे युद्ध के तौर पर जाना जाता है।


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