Rajasthan के इन शिक्षकों के हौसले को सलाम, मोबाइल नेटवर्क नहीं, ऊंट से जाते हैं बच्चों को पढ़ाने उनके घर

बाड़मेर में शिक्षक स्कूल को ही छात्रों के दरवाजे तक ले जा रहे हैं और कोशिश कर रहे हैं कि Covid-19 के दौरान बच्चों की पढ़ाई पर कोई असर न पड़े

अपडेटेड Jul 10, 2021 पर 4:26 PM
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कोरोनावायरस (Coronavirus) की दूसरी लहर (Second Wave) के दौरान स्कूल बंद होने के कारण अधिकतर बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई करनी पड़ रही है। मगर देश के कुछ इलाके ऐसे भी हैं, जो मोबाइल और नेटवर्क से आज भी अछूते हैं। महामारी के इस दौर में एक बार फिर शिक्षकों ने ये एहसास दिलाया कि जब तक वो हैं, तब तक बच्चों की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आएगी। ऐसा ही एक मामला सामने आया राजस्थान के बाड़मेर से, जहां शिक्षक स्कूल को ही छात्रों के दरवाजे तक ले जा रहे हैं और कोशिश कर रहे हैं कि महामारी के दौरान बच्चों की पढ़ाई पर कोई असर न पड़े।

महामारी के बीच छात्रों की मदद के लिए ज्यादा प्रयास करके, ये शिक्षक ऊंट से रेगिस्तानी इलाकों में ऐसे छात्रों के घरों तक जा रहे हैं, जिनके यहां मोबाइल नेटवर्क नहीं हैं। निर्धारित शेड्यूल के अनुसार, ये शिक्षक बाड़मेर जिले में अपने स्कूलों तक पहुंचने के लिए दिन में तीन बार ऊंट की सवारी करते हैं।

 

न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए, राजस्थान शिक्षा विभाग के निदेशक सौरव स्वामी ने कहा, "75 लाख छात्रों में से कई के पास मोबाइल फोन नहीं है। इसलिए राज्य सरकार ने फैसला किया कि कक्षा एक से आठ के लिए टीचर्स हफ्ते में एक बार उनके घर जाएंगे और कक्षा 9 से 12 के लिए हफ्ते में दो बार जाएंगे।"


इस बीच स्कूल प्रशासन की तरफ से भी शिक्षकों के इस प्रयास की खूब सराहना की जा रही है।

शासकीय हायर सीनियर स्कूल भीमथल के प्रिंसिपल रूम सिंह जाखड़ ने कहा, "छात्रों को समय पर रुटीन नोट्स मिल सकें, ये सुनिश्चित करने के लिए कुछ शिक्षक वास्तव में कड़ी मेहनत कर रहे हैं। उनमें से कुछ मुकनाराम ढाका, बिहारीलाल ढाका और बीरमाराम बाना हैं। हमने ऐसे 100 छात्रों का चयन किया है, जिनके यहां शिक्षक पहुंचेंगे।"

प्रिंसिपल रूम सिंह जाखड़ ने आगे कहा, "मैं शिक्षकों की इस टीम को सलाम और धन्यवाद देता हूं। इसे आगे भी जारी रखा जाना चाहिए।"

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