नेशनल लेवल पहलवान निशा दहिया (Nisha Dahiya) और उनके भाई की गोली मारकर हत्या की खबर फर्जी निकली। खुद निशा ने एक वीडियो मैसेज जारी कर इसकी पुष्टि की है। इससे पहले खबर आई थी कि हरियाणा के सोनीपत के हलालपुर में सुशील कुमार कुश्ती एकेडमी में बुधवार को अज्ञात हमलावरों ने पहलवान निशा और उनके भाई की हत्या कर दी। साथ ही घटना के दौरान निशा की मां धनपति भी घायल हो गईं और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। उन्हें रोहतक के PGI अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
मगर अब यह खबर फर्जी निकली और रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा जारी एक वीडियो में पहलवान निशा दहिया ने कहा, "मैं सीनियर नेशनल खेलने के लिए गोंडा में हूं। मैं ठीक हूं। यह एक फेक न्यूज है। मैं ठीक हूं।"
वहीं भारतीय टीम के साथ गए कोच ने PTI से कहा, "सोनीपत में जिस पहलवान की गोली मारकर हत्या की गई, वो एक नई खिलाड़ी निशा दहिया है, न कि अंडर-23 विश्व चैंपियनशिप की कांस्य पदक विजेता निशा।"
वहीं SP सोनीपत राहुल शर्मा ने बताया कि "यह निशा दहिया, जिनकी गोली मारकर हत्या की गई और मेडल विजेता पहलवान निशा दहिया दो अलग-अलग लोग हैं। पदक विजेता पहलवान पानीपत की हैं और अभी एक इवेंट में हैं।" दरअसल सोनीपत में पहलवान और उनके भाई की गोली मारकर हत्या कर दी। साथ ही गोली लगने से घायल उनकी मां भी अस्पताल में भर्ती हैं।
सर्बिया के बेलग्रेड में शुक्रवार को कुश्ती अंडर-23 विश्व चैंपियनशिप में निशा दहिया ने 65 किलोग्राम भारवर्ग में कांस्य पदक (Bronze Medal) जीता था। पीएम नरेंद्र मोदी ने भी दूसरी महिला पहलवानों के साथ उनके सफल प्रदर्शन के लिए उनकी प्रशंसा की।
PM मोदी ने ट्वीट कर कहा था, "बेलग्रेड में कुश्ती चैंपियनशिप में पदक जीतने पर शिवानी, अंजू, दिव्या, राधिका और निशा को बधाई। उनका प्रदर्शन खास है और पूरे भारत में कुश्ती को और भी लोकप्रिय बनाने में योगदान देगा।"
निशा दहिया का कुश्ती करियर
निशा दहिया ने 2014 में श्रीनगर में कैडेट राष्ट्रीय चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता और अगले साल इस उपलब्धि को दोहराया। उनका पहला अंतरराष्ट्रीय पदक 2014 में आया था, जब उन्होंने एशियाई चैंपियनशिप से 49 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक के साथ वापसी की थी। उन्होंने अगले साल 60 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल जीता। उन्होंने 2015 में राष्ट्रीय चैंपियनशिप में भी कांस्य पदक जीता था।
ब्रॉन्ज जीतने के बाद, उन्होंने मेल्डोनियम के लिए पॉजिटिव टेस्ट किया, यह एक दवा है, जिसे 2016 में वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी की तरफ से प्रतिबंधित कर दिया गया था। इसके बाद पहलवान पर चार साल का प्रतिबंध लगा। मेल्डोनियम वही दवा है, जिसने टेनिस सुपरस्टार मारिया शारापोवा को मुश्किल में डाल दिया था।
2015 में कैडेट मेडल और नेशनल चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने के बाद उन्हें रेलवे में नौकरी मिलने वाली थी, लेकिन डोपिंग प्रतिबंध के बाद मौका हाथ से निकल गया। हालांकि, अक्टूबर में अंडर-23 राष्ट्रीय चैंपियनशिप और जालंधर में 65 किलोग्राम में गोल्ड मेडल जीतने के बाद निशा दहिया ने 2019 में वापसी की।