Virat Kohli-Gautam Gambhir Interview: क्रिकेट के मैदान पर आक्रामकता के लिए मशहूर टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली और मुख्य कोच गौतम गंभीर दोनों राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से हैं। इनके बीच कई समानताओं में से एक यह भी है कि ईश्वर पर दोनों की अटूट आस्था है। विराट कोहली और गौतम गंभीर ने बताया कैसे ईश्वरीय हस्तक्षेप ने उन्हें दबाव की स्थितियों का सामना करने और कुछ यादगार पारियां खेलने में मदद की। विराट कोहली और गौतम गंभीर के बीच IPL के कई सीजन में तीखी बहस हुई थी। लेकिन बुधवार (18 सितंबर) को बांग्लादेश के खिलाफ पहले टेस्ट से पहले दोनों दिग्गजों ने एक साथ बैठकर खुलकर बातचीत की।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) टीवी के लिए एक दूसरे से बातचीत में विराट कोहली (Virat Kohli) और गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) ने एक दूसरे से कई समानताओं पर बात की। गंभीर ने बताया कि जब वह 15 साल पहले नेपियर में न्यूजीलैंड के खिलाफ एक टेस्ट बचाने की कोशिश में थे तब उन्होंने कैसे 'हनुमान चालीसा' पढी। इस दौरान उन्होंने दो दिन तक चली एक यादगार पारी खेल डाली।
गंभीर ने खुलासा किया कि कोहली ने 2014 के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान गेंद का सामना करने से पहले 'ओम नमः शिवाय' का जाप किया था, जो एमएस धोनी के टेस्ट करियर का अंत था। कोहली ने 2014 में ऑस्ट्रेलिया में अपनी सफल सीरीज खेली, जिसमें उन्होंने 86.50 की औसत से 4 शतकों के साथ 692 रन बनाए।
2014 में विराट कोहली ने आस्ट्रेलिया में चार टेस्ट शतक लगाए थे। बल्लेबाजी के दौरान वह 'ओम नम: शिवाय' जाप कर रहे थे। बीसीसीआई टीवी पॉडकास्ट पर कोहली ने गंभीर से पूछा, "भारत आस्ट्रेलिया सीरीज पर बात करते हैं। सबसे खास हमारी धरती पर बनाया गया दोहरा शतक होगा। मैं जानना चाहता हूं कि उस समय दिमाग में क्या चल रहा था। इतने स्थिर और संयमित होकर कैसे खेला ।"
गंभीर ने इस पर कहा, "मेरे बारे में बात करने की बजाय मुझे याद है कि आस्ट्रेलिया में जब तुमने बंपर सीरीज खेली थी। जहां तुमने बेशुमार रन बनाए और तुमने मुझे बताया कि तुम हर गेंद से पहले ओम नम: शिवाय बोल रहे थे। इससे तुम्हे मदद मिली।" बता दें कि गंभीर ने 10 घंटे 43 मिनट तक चली पारी में 136 रन बनाकर भारत को पारी की हार से बचाया था।
गंभीर ने कहा, "नेपियर में ढाई दिन तक चली पारी के दौरान मैने एक ही काम किया कि हनुमान चालीसा पढता रहा। तुमने 'ओम नम: शिवाय' जपा तो मैने 'हनुमान चालीसा' पढी। इससे काफी मदद मिली। अपने कैरियर में ऐसे मौके कम आते हैं और वह अलौकिक अहसास है।"