गुइलेन-बैरे सिंड्रोम(जीबीएस) के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। महाराष्ट्र पश्चिम बंगाल के बाद अब आंध्र प्रदेश में भी यह वायरस पहुंच गया है। आंध्र प्रदेश में जीबीएस से अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है। हाल ही में एक महिला की मौत हुई है। अलासंडालापल्ली गांव की रहने वाली 45 साल की कामलम्मा को गुंटूर के सरकारी जनरल अस्पताल (Government General Hospital - GGH) में भर्ती कराया गया था। आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि मौजूदा समय में राज्य में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) के 17 मामले सामने आए हैं। आंध्र प्रदेश के सभी छह जिलों में जीबीएस के मामले सामने आए हैं।
विशाखापत्तनम और गुंटूर में पांच-पांच मामले दर्ज किए गए, जबकि काकीनाडा जिले में चार मामले सामने आए। आंध्र प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि विजयनगरम, विजयवाड़ा और अनंतपुर जिलों में एक-एक मामला दर्ज किया गया है।
तेज बुखार आने पर महिला को किया गया था भर्ती
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला को तेज बुखार और शरीर में कमजोरी की वजह से भर्ती कराया गया था। इसके बाद उन्हें 3 फरवरी को गुंटूर जीजीएच में ट्रांसपर कर दिया गया था। यहां टेस्ट करने पर GBS की पुष्टि हुई। कमलम्मा को सहायक चिकित्सा के साथ पांच दिनों तक IV इम्युनोग्लोबुलिन उपचार दिया गया। इलाज कर रहे डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें 10 फरवरी को इंट्यूबेट किया गया। फिर वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। हालांकि, उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई। तीन दिनों के भीतर उन्हें तीन बार दिल का दौरा पड़ा। रविवार को तीसरे दौरा पड़ा। इसके बाद उनकी मौत हो गई। इसबीच स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। जीबीएस के लक्षण दिखने पर जांच शुरू कर दी है।
जानिए क्या है गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS)?
गुइलेन-बैरे सिंड्रोम एक ऐसी बीमारी हैं, जिसमें पीड़ित की इम्युनिटी अपने शरीर के इम्यूनिटी के खिलाफ काम करने लगती है। इसलिए इसे ऑटो इम्यून डिसऑर्डर कहा जाता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह बीमारी बैक्टीरीयल या वायरल इंफेक्शन की वजह से होती है। इस बीमारी से पीड़ित मरीजों को कमजोरी के अलावा हाथ और पैरों में झुनझुनी होती है। इसके अलावा शुरुआत में सांस संबंधी बीमारी भी महसूस होती है, लेकिन लंबे समय के बाद शरीर पैरालाइज (लकवाग्रस्त) हो जाता है।
गुइलेन-बैरे सिंड्रोम के लक्षण
1 - हाथ और पैर की उंगलियों, टखनों या कलाई में सुई चुभने जैसा एहसास होता है।
2 - पैरों में कमजोरी जो शरीर के ऊपरी हिस्से तक फैल सकती है।
3 - चलने या सीढ़ियां चढ़ना मुश्किल हो जाता है।
4 - बोलने, चबाने या निगलने में परेशानी होने लगती है।
5 - पेशाब पर नियंत्रण न रह जाना या हृदय गति का बहुत बढ़ जाना।
गुलियन बेरी सिंड्रोम से ऐसे करें बचाव
1 - गुलियन बेरी सिंड्रोम (GBS) से बचाव के लिए संतुलित आहार लेना बहुत जरूरी है।
2 - इसके साथ ही रोजाना वर्कआउट या मेडिटेशन करें।
3 - अपना वजन कंट्रोल में रखें। अनहेल्दी लाइफस्टाइल से हमेशा दूर रहें।