आयुर्वेद में ऐसी कई औषधियां हैं, जो न केवल बीमारियों से बचाती हैं, बल्कि शरीर और मन को भी संतुलन में रखती हैं। इन्हीं में से एक है – खसखस। यह छोटे-छोटे दानों वाला बीज कई स्वास्थ्य लाभों से भरपूर है और इसकी ठंडी तासीर इसे गर्मियों का आइडियल सुपरफूड बना देती है। ग्लोबल इटरनल आयुर्वेद संगठन से जुड़े पंचकर्म विशेषज्ञ और न्यूरोथेरेपिस्ट डॉ. कुणाल शंकर बताते हैं कि खसखस का नियमित और सीमित मात्रा में सेवन शरीर की गर्मी कम करता है, पाचन को दुरुस्त करता है और स्किन से जुड़ी समस्याओं से भी राहत देता है।
डॉ. शंकर ने आयुर्वेद ग्रंथ भैषज्य रत्नावली का जिक्र करते हुए बताया कि इसमें खसखस (जिसे उशीरा भी कहा जाता है) को पाचक, शीतल, ज्वरनाशक (Antipyretic) और सूजन कम करने वाला बताया गया है। यह न केवल शरीर की गर्मी को संतुलित करता है, बल्कि थकान, घबराहट और बेचैनी में भी राहत देता है।
खसखस में प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम, जिंक और आयरन जैसे पोषक तत्व भरपूर होते हैं। इनमें मौजूद जिंक इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है, जिससे मौसमी बीमारियों से बचाव होता है। इसके अलावा Omega-6 फैटी एसिड दिल की सेहत को बढ़ावा देते हैं और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाते हैं। इसमें प्यास मिटाने की गुण के साथ घाव को ठीक करने और तेज दर्द में राहत देने के गुण भी होते हैं।
गर्मी में राहत का घरेलू नुस्खा
खसखस से तैयार शरबत गर्मियों में शरीर को अंदर से ठंडा रखता है और डिहाइड्रेशन से भी बचाता है। यह पेट की जलन और एसिडिटी को शांत करने में मददगार है। आयुर्वेदाचार्य के अनुसार, खसखस का पानी पेट का पीएच बैलेंस करता है और मन को भी शांति देता है।
खसखस का चूर्ण घी के साथ लेने से हृदय संबंधी दर्द में राहत मिलती है, जबकि इसे मुनक्का के साथ मिलाकर खाने से शरीर के दूसरे दर्द कम होते हैं। उल्टी की समस्या में भी यह काफी असरदार माना गया है – खासकर अगर पुदीना अर्क के साथ इसको लिया जाए।
जहां एक ओर खसखस शरीर के लिए लाभकारी है, वहीं डॉ. शंकर इसकी सीमित मात्रा में ही सेवन करने की सलाह देते हैं। बहुत ज्यादा मात्रा में इसका सेवन शरीर को सुस्त बना सकता है। गर्भवती महिलाओं और नशे की प्रवृत्ति रखने वाले लोगों को खसखस का इस्तेमाल करने से पहले विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।