Hantavirus: हंता वायरस से जुड़े इन 7 मिथकों पर अगर आप भी कर रहे हैं भरोसा, तो पहले जान लें एक्सपर्ट्स की राय

Hantavirus को लेकर इन दिनों लोगों के बीच डर और भ्रम तेजी से बढ़ रहा है। सोशल मीडिया पर इससे जुड़ी कई बातें वायरल हो रही हैं, जिनमें सच कम और अफवाहें ज्यादा हैं। डॉक्टरों का कहना है कि घबराने के बजाय सही जानकारी रखना जरूरी है। आइए जानते हैं हंता वायरस से जुड़े 7 बड़े मिथक और उनकी असली सच्चाई

अपडेटेड May 11, 2026 पर 8:57 AM
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हंता वायरस गंभीर जरूर हो सकता है, लेकिन हर मरीज की मौत हो ऐसा जरूरी नहीं है।

दुनियाभर में इन दिनों हंता वायरस को लेकर लोगों के बीच काफी चर्चा हो रही है। कई देशों में इसके कुछ मामले सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर डर और अफवाहें तेजी से फैलने लगी हैं। बहुत से लोग इसे कोरोना जैसी नई महामारी मान रहे हैं, जबकि डॉक्टरों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है। यह संक्रमण दुर्लभ जरूर है, लेकिन सही जानकारी और सावधानी से इससे बचाव संभव है। विशेषज्ञों के अनुसार लोगों को बिना वजह डरने के बजाय साफ-सफाई और स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए। इंटरनेट पर कई गलत बातें भी वायरल हो रही हैं, जिससे भ्रम की स्थिति बन रही है।

ऐसे में जरूरी है कि लोग केवल भरोसेमंद जानकारी पर ही विश्वास करें। डॉक्टरों का कहना है कि जागरूकता और सतर्कता ही इस तरह के संक्रमण से बचने का सबसे आसान और असरदार तरीका है।

क्या हंता वायरस इंसान से इंसान में तेजी से फैलता है?


कई लोग मानते हैं कि ये वायरस कोरोना की तरह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैलता है, जबकि ऐसा नहीं है। NDTV की एक रिपोर्ट के मुताबिक हंता वायरस मुख्य रूप से चूहों और उनके मल-मूत्र से फैलता है। संक्रमित जगहों की सफाई के दौरान हवा में मौजूद वायरस शरीर में जा सकता है। इंसान से इंसान में इसका फैलना बेहद दुर्लभ माना जाता है।

क्या हंता वायरस फ्लू या COVID-19 जैसा ही है?

शुरुआती लक्षण जैसे बुखार, थकान और खांसी देखने के बाद लोग इसे फ्लू या कोरोना जैसा समझ लेते हैं। लेकिन विशेषज्ञ बताते हैं कि ये वायरस अलग तरह से शरीर पर असर करता है। गंभीर स्थिति में ये फेफड़ों, किडनी और शरीर के दूसरे अंगों को तेजी से नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए लक्षण दिखने पर लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

क्या धूल साफ करने के बाद हर बुखार हंता वायरस होता है?

बहुत से लोग सफाई के बाद हल्का बुखार या गले में खराश होने पर डर जाते हैं। डॉक्टरों के अनुसार हर बार ऐसा होना हंता वायरस का संकेत नहीं होता। खतरा तब ज्यादा बढ़ता है जब जगह पर चूहों का मल, पेशाब या गंदगी मौजूद हो। केवल धूल से संक्रमण होना जरूरी नहीं है।

क्या सिर्फ गांवों में ही होता है हंता वायरस का खतरा?

यह मानना गलत है कि यह बीमारी सिर्फ जंगलों या गांवों तक सीमित है। चूहे शहरों के घरों, गोदामों, बाजारों और ऑफिसों में भी पाए जाते हैं। जहां साफ-सफाई की कमी और चूहों की मौजूदगी होती है, वहां संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए शहरों में रहने वाले लोगों को भी सावधान रहने की जरूरत है।

क्या केवल मास्क पहनना काफी है?

कुछ लोग सोचते हैं कि सफाई के समय सिर्फ मास्क पहन लेने से पूरी सुरक्षा हो जाती है। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि सही सफाई तरीका ज्यादा जरूरी है। संक्रमित जगहों पर सूखी झाड़ू लगाने या वैक्यूम करने से वायरस हवा में फैल सकता है। पहले उस जगह पर पानी या डिसइन्फेक्टेंट छिड़कना चाहिए, फिर दस्ताने और मास्क पहनकर सफाई करनी चाहिए।

क्या हंता वायरस होने पर मौत तय है?

हंता वायरस गंभीर जरूर हो सकता है, लेकिन हर मरीज की मौत हो ऐसा जरूरी नहीं है। समय पर इलाज और सही देखभाल से मरीज ठीक भी हो सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत, ज्यादा कमजोरी या तेज बुखार जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

क्या इस वायरस से बचाव संभव नहीं?

विशेषज्ञों का कहना है कि हंता वायरस से बचाव पूरी तरह संभव है। घर और आसपास सफाई रखना, खाने की चीजों को बंद डिब्बों में रखना और चूहों को घर से दूर रखना बेहद जरूरी है। दीवारों या दरवाजों के छेद बंद करने से भी चूहों की एंट्री रोकी जा सकती है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

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