AGR मामले में सुप्रीम कोर्ट में फिर होगी सुनवाई, टेलीकॉम कंपनियों पर करीब 1 लाख करोड रुपए का बकाया

सीएनबीसी-आवाज़ के असीम मनचंदा ने AGR CASE पर ज्यादा जानकारी देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट टेलीकॉम कंपनियों की याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। टेलीकॉम कंपनियों ने AGR रकम पर आपत्ति जताई थी। इतना ही नहीं टेलीकॉम कंपनियों ने AGR रकम तय करने के तरीके पर भी आपत्ति जताई थी

अपडेटेड Oct 09, 2023 पर 3:09 PM
टेलीकॉम कंपनियों पर करीब 1 लाख करोड़ रुपये का AGR बकाया है। सरकार ने इसके लिए कंपनियों को 4 साल का मोरेटोरियम पीरियड दिया हुआ है

एजीआई (AGR) के मामले में फिर से नया मोड़ आता हुआ नजर आ रहा है। AGR मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में एक बार फिर सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करने को सहमत हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कंपनियों की क्यूरेटिव याचिका को मंजूरी दी है। टेलीकॉम कंपनियों ने मामले की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका दायर की थी। इस अर्जी पर सुनवाई करने के लिए कोर्ट तैयार हो गया है। टेलीकॉम कंपनियों ने AGR (Adjusted Gross Revenue) की कैलकुलेशन में अर्थमैटिक गलतियों को लेकर याचिका दायर की थी जिस पर अब सुनवाई होनी है।

AGR CASE पर ज्यादा जानकारी देते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के असीम मनचंदा ने कहा कि AGR मामले में सुप्रीम कोर्ट टेलीकॉम कंपनियों की याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। असीम ने कहा कि टेलीकॉम कंपनियों ने AGR रकम पर आपत्ति जताई थी। इतना ही नहीं टेलीकॉम कंपनियों ने AGR रकम तय करने के तरीके पर भी आपत्ति जताई थी। इसको लेकर कंपनियों ने देश की सर्वोच्च अदालत में गुहार लगाई। इस मामले में कोर्ट में याचिका दायर की जिस पर कोर्ट सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया।

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खुली कोर्ट में होगी सुनवाई

असीम ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई खुली कोर्ट में करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कंपनियों की क्यूरेटिव याचिका को मंजूरी दे दी है। हालांकि फिलहाल मामले की सुनवाई कब होगी यह तय नहीं हुआ है। टेलीकॉम कंपनियों ने याचिका में अर्थमैटिक गलतियां सुधारने की मांग की थी। कंपनियों का कहना है कि कई मामलों में AGR की गणना दो बार की गई है।

खबर पर और जानकारी देते हुए असीम मनचंदा ने कहा कि कई मामलों में जमा और गणना भी गलत होने का दावा किया गया है। बता दें कि इस समय टेलीकॉम कंपनियों पर करीब 1 लाख करोड़ रुपये का AGR बकाया है। इसका मतलब ये है कि टेलीकॉम कंपनियों को ब्याज के साथ करीब 1 लाख करोड रुपए चुकाना है। सरकार ने इसके लिए कंपनियों को 4 साल का मोरेटोरियम पीरियड दिया हुआ है।

 

 

 

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