वारिस पंजाब दे (Waris Punjab De) संगठन का लीडर भगोड़ा अमृतपाल सिंह (Amritpal Singh) अब तक पुलिस की पकड़ से फरार है। खालिस्तान (Khalistan) समर्थक अमृतपाल सिंह के कारनामे एक एक कर अब खुलते जा रहे हैं। इस बीच जानकारी मिली है कि अगस्त 2022 में दुबई से भारत लौटने से पहले अमृतपाल जॉर्जिया (Georgia) गया था, जहा उसने अपनी एक कॉस्मेटिक सर्जरी कराई थी, ताकि वह खालिस्तानी आतंकी जरनैल सिंह भिंडरांवाले (Jarnail Singh Bhindranwale) के जैसा दिख सके।
Indian Express की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि असम के डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल में बंद अमडृतपाल सिंह के साथियों ने पूछताछ के दौरान ये खुलासा किया। अमृतपाल ने लगभग दो महीने जॉर्जिया में बिताए।
पिछले करीब एक महीने से पंजाब पुलिस अमृतपाल सिंह की तलाश में जुटी है। रिपोर्ट में एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है, "गिरफ्तार किए गए लोगों ने खुफिया अधिकारियों को बताया कि वह भिंडरावाले की तरह दिखने के लिए जॉर्जिया में सर्जरी कराने गया था।"
Moneycontrol Hindi स्वतंत्र रूप से इस रिपोर्ट की पुष्टि नहीं करता है।
कट्टरपंथी उपदेशक 18 मार्च से फरार है, लेकिन उसके चाचा हरजीत सिंह और दलजीत सिंह कलसी समेत उसके आठ करीबी साथियों को गिरफ्तार कर असम के डिब्रूगढ़ भेज दिया गया है। खुफिया अधिकारियों की एक टीम ने हाल ही में उनसे पूछताछ करने के लिए डिब्रूगढ़ गई थी।
खुफिया एजेंसियां ये पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि पंजाबी अभिनेता और कार्यकर्ता दीप सिद्धू की मौत के बाद अगस्त में अमृतपाल अचानक कैसे दिखाई दिया और कैसे उसने 'वारिस पंजाब दे' के नेता का पद संभाला।
अमृतपाल के साथियों ने कथित तौर पर पूछताछ के दौरान कहा कि उसने दिल्ली में किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया पर कई पोस्ट किए थे और कुछ लोगों के संपर्क में आया था।
वहीं दीप सिद्धू को फरवरी 2021 में तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के खिलाफ किसानों के आंदोलन के चरम पर गणतंत्र दिवस पर लाल किले पर हुई हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। दो महीने बाद जमानत पर रिहा हुए सिद्धू की एक साल बाद एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी।
जब अमृतपाल दुबई में था, तो वह खालिस्तानी आतंकवादी लखबीर सिंह रोडे के भाई जसवंत सिंह रोडे और आतंकवादी परमजीत सिंह पम्मा के संपर्क में था। जसवंत सिंह रोडे के पाकिस्तान में होने का शक है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि संगठन को पाकिस्तान से फंडिंग मिलती थी, जिसका इस्तेमाल पर्सनल लोन चुकाने के लिए भी किया गया था।
दुबिया में अपने चाचा के ट्रांसपोर्ट बिजनेस के लिए काम करने वाले अमृतपाल सिंह ने भिंडरावाले के बाद खुद को ऐसा ही गेटअप देने की कोशिश की। वह भिंडरावाले की पोशाक और तौर-तरीकों की नकल करने के साथ-साथ एक अलग सिख राज्य की भी बात करता था।