सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को कहा कि देश की लॉजिस्टिक कॉस्ट जो कि मौजूदा वक्त में टोटल जीडीपी का 16% है वह साल 2024 के अंत तक घटकर 9% हो जाएगी। एसोचैम की सालाना आम बैठक, 2023 को संबोधित करते हुए, गडकरी ने आश्वासन दिया कि देश की हाई लॉजिस्टिक कॉस्ट को 2024 के अंत तक 9% तक लाया जाएगा और इसे दुनिया की विकसित अर्थव्यवस्थाओं के बराबर या उससे भी बेहतर बनाया जाएगा। हम इस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए काम कर रहे हैं।
लॉजिस्टिक्स लागत कम होने से होगा ये बड़ा फायदा
यूरोपीय देशों और संयुक्त राज्य अमेरिका में लॉजिस्टिक कॉस्ट लगभग 12% है जबकि चीन में यह लगभग 8% है। कम लॉजिस्टिक्स लागत सप्लाई चेन में लागत को कम करने में मदद करती है और भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनाती है। गडकरी ने कहा कि अगर रसद लागत को 16% से 7% घटाकर 9% कर दिया जाए, तो देश की कमाई डेढ़ गुना बढ़ जाएगी। मंत्री ने कार्यक्रम में उद्योग के प्रतिभागियों से कहा, "पैसा बचाना ही पैसा कमाना है।" इसे पूरा करने के लिए सरकार रसद लागत में कमी और रोडवेज के साथ रेलवे दोनों में सुधार पर ध्यान केंद्रित कर रही है। हम प्रमुख शहरों और केंद्रों के बीच की दूरी को कम करने पर ध्यान देने के साथ हरित राजमार्ग और औद्योगिक गलियारे का निर्माण कर रहे हैं।
गडकरी ने किया इन बड़े राजमार्गों का जिक्र
गडकरी ने कुछ प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के बारे में बात करते हुए कहा, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के पूरा होने के बाद, लोग केवल 12 घंटों में दिल्ली और मुंबई के बीच यात्रा कर सकते हैं। इसके अलावा अब नागपुर मुंबई 5 घंटे में और नागपुर से पुणे केवल 6 घंटे में पहुंचा जा सकता है। इससे लॉजिस्टिक लागत कम करने में मदद मिलेगी। हम जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में सुरंग बना रहे हैं और इनसे दूरी बहुत कम हो जाएगी। लिए मनाली से रोहतांग तक जाने में हमें साढ़े तीन घंटे का समय लगता है और अब अटल सुरंग को केवल 45 मिनट में पार किया जा सकता है।
ईंधन को बचाने पर की चर्चा
गडकरी ने वैकल्पिक ईंधन पर बात करते हुए कहा कि हमारा ध्यान कचरे को पैसे में बदलने पर होना चाहिए। दिल्ली में ठोस कचरे के तीन पहाड़ हैं। अगले दो वर्षों के भीतर इस कचरे का उपयोग सड़क निर्माण में किया जाएगा। हम बाहरी-बाहरी रिंग रोड विकसित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जो 13 रेलवे लाइनों से होकर गुजरती है। इस जोन के आसपास के थोक बाजारों और गोदामों को निर्धारित जोन में शिफ्ट करने का रोडमैप तैयार किया गया है। इससे दिल्ली में भीड़भाड़ कम होगी और कॉमर्शियल गाड़ियां दिल्ली के बाहर से निकल जाया करेंगी।
पराली को कोलतार में बदलने की हो रही है तैयारी
नितिन गडकरी ने कहा कि केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान ने केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान के सहयोग से चावल के भूसे (परली) को कोलतार में बदलने के लिए तकनीक विकसित की है जिसका उपयोग सड़क परियोजनाओं के लिए किया जाएगा। इससे न केवल प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी बल्कि कोलतार की आयात लागत में भी कमी आएगी। तकनीक की मदद से चावल के भूसे (परली) को भी बायो एथेनॉल में बदला जा रहा है और इसे वैकल्पिक ईंधन माना जा रहा है। हमारा ध्यान भी वैकल्पिक ईंधन के रूप में हाइड्रोजन की ओर ट्रांसफर हो गया है।