जब CM मोहन चरण माझी को इंस्पेकटर ने थाने से कर दिया था बाहर! ओडिशा के मुख्यमंत्री ने याद किया वो किस्सा

माझी ने कहा कि क्योंझर निर्वाचन क्षेत्र में रायसुआन और गोपीनाथपुर पंचायत के निवासियों ने 2 मई को NH-20 को जाम करके पीने के पानी के संकट पर विरोध प्रदर्शन किया था। ये तब की बात है, जब ओडिशा में विधानसभा चुनाव चल रहे थे। इससे अपमानित महसूस करते हुए, माझी ने इंस्पेक्टर की जवाबदेही की मांग करते हुए पुलिस स्टेशन के बाहर धरना भी दिया

अपडेटेड Sep 27, 2024 पर 7:40 PM
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जब CM मोहन चरण माझी को इंस्पेकटर ने थाने से कर दिया था बाहर! ओडिशा के मुख्यमंत्री ने याद किया वो किस्सा

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शुक्रवार को अतीत की एक घटना का जिक्र किया, जब एक इंस्पेक्टर ने उन्हें एक पुलिस स्टेशन से "बाहर निकलने" के लिए कह दिया था। माझी ने लोक सेवा भवन में दो दिन तक चलने वाले कलेक्टर सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद ये किस्सा सुनाया। बड़ी बात ये है कि ये वाकया उनके मुख्यमंत्री बनने से बमुश्किल एक महीने पहले का था।

माझी ने कहा कि क्योंझर निर्वाचन क्षेत्र में रायसुआन और गोपीनाथपुर पंचायत के निवासियों ने 2 मई को NH-20 को जाम करके पीने के पानी के संकट पर विरोध प्रदर्शन किया था। ये तब की बात है, जब ओडिशा में विधानसभा चुनाव चल रहे थे।

मुझे गिरफ्तार करने की दी थी धमकी: CM माझी


माझी ने कहा, "इंस्पेक्टर ने आदर्श आचार संहिता लागू होने की बात कहते हुए पुलिस स्टेशन में मेरी मौजूदगी पर सवाल उठाया और मुझसे कहा कि 'बाहर निकल जाओ' या नहीं वो मुझे गिरफ्तार कर लेंगे।"

इस पर माझी ने सवाल किया, "क्या एक विधायक, जो उम्मीदवार भी है, लोगों की समस्याओं को लेकर पुलिस स्टेशन नहीं जा सकता?"

इससे अपमानित महसूस करते हुए, माझी ने इंस्पेक्टर की जवाबदेही की मांग करते हुए पुलिस स्टेशन के बाहर धरना भी दिया।

इंस्पेक्टर को कर दिया था माफ

माझी ने इस बात पर जोर दिया कि पुलिस वालों को थाने में नागरिकों के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने कहा, "भगवान जगन्नाथ के आशीर्वाद से मैं सीएम बना। मैं उसके बाद इंस्पेक्टर की स्थिति की केवल कल्पना ही कर सकता था। मैंने यह मानते हुए उसे माफ कर दिया कि उसने दबाव में काम किया है।"

उन्होंने कहा कि जब लोग शिकायत दर्ज कराने आते हैं, तो उन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए और वरिष्ठ अधिकारियों को इस पर गौर करने का निर्देश दिया जाना चाहिए।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ भी हुई बदसलूकी!

माझी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से जुड़ा एक उदाहरण भी दिया, जब दो दशक पहले एक जिला कलेक्टर ने उनका अपमान किया था, तब मुर्मू एक मंत्री थीं।

उन्होंने राष्ट्रपति मुर्मू से जुड़ी एक और घटना को भी याद किया, जब वह BJP-BJP गठबंधन सरकार में मंत्री थीं।

एक केंद्रीय मंत्री के साथ किसी जगह पर जाने के दौरान जिला कलेक्टर ने केंद्रीय मंत्री का ही स्वागत किया। माझी ने कहा, "अधिकारी ने उनका अभिवादन न करने के लिए माफी भी नहीं मांगी।"

उन्होंने अधिकारियों से इन प्रथाओं को बदलने और सरकारी संस्थानों के भीतर सम्मान और जवाबदेही की संस्कृति को बढ़ावा देने का आग्रह किया।

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