भारत में घातक प्लांट फंगस की दस्तक! कोलकाता में मिला दुनिया का पहला केस, जानें कितनी दुर्लभ और खतरनाक है ये बीमारी

जर्नल मेडिकल माइकोलॉजी केस रिपोर्ट्स में डॉक्टरों ने कहा कि एक 61 साल का शख्स कोलकाता में कंसल्टेंट अपोलो मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल्स के आउट पेशेंट विभाग में आया था। ये शख्स पिछले तीन महीनों से आवाज में भारीपन, खांसी, गले में खराबी, थकान, निगलने में कठिनाई और एनोरेक्सिया की शिकायत बता रहा था

अपडेटेड Mar 31, 2023 पर 8:03 PM
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भारत में घातक प्लांट फंगस की दस्तक

इन दिनों देश में एक बार फिर कोरोना वायरस (Coronavirus) के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैं, ऊपर मौसमी फ्लू (Seasonal Flu) भी अपना असर दिखा रहा है। ऐसे में पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक शख्स के भीतर ऐसी बीमारी का पता चला है, जो प्लांट फंगस (Plant Fungus) के कारण होती है। डॉक्टरों का मानना है कि इंसानों में माइक्रोऑर्गेनिज्म से फैलने वाले संक्रमण का ये पहला केस है। डॉक्टरों ने कहा कि इससे ऐसा मालूम पड़ता है कि प्लांट फिंगी (Plant Fungi) के नजदीकी कॉन्टैक्ट में आने पर प्लांट पैथोजेंस का क्रॉसओवर इंसानों के भीतर हो गया है।

जर्नल मेडिकल माइकोलॉजी केस रिपोर्ट्स में डॉक्टरों ने कहा कि एक 61 साल का शख्स कोलकाता में कंसल्टेंट अपोलो मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल्स के आउट पेशेंट विभाग में आया था। ये शख्स पिछले तीन महीनों से आवाज में भारीपन, खांसी, गले में खराबी, थकान, निगलने में कठिनाई और एनोरेक्सिया की शिकायत बता रहा था।

इस शख्स को पहले कभी डायबिटीज, HIV संक्रमण, गुर्दे या किसी पुरानी बीमारी या उसकी दवा को कोई रिएक्शन भी नहीं हुआ था। ये मरीज पेशे से एक प्लांट माइकोलॉजिस्ट है।


डॉक्टरों ने बताया कि ये शख्स अपनी रिसर्च के दौरान लंबे समय तक सड़ने वाले मटेरियल, मशरूम और कई अलग-अलग तरह के प्लांट फंगी के साथ काम कर रहा था। हालांकि, उसकी छाती की एक्स-रे रिपोर्ट सामान्य आई, लेकिन उसके गले के सीटी स्कैन ने पैराट्रैचियल फोड़ा सामने आया।

इसके बाद डॉक्टरों ने उस फोड़े में पस निकाला और आगे की जांच के लिए उसका सैंपल भेज दिया। कई टेस्ट के बाद, सैंपल को "फंगस की जांच और रिसर्च के लिए WHO के सहयोगी केंद्र" भेजा गया था। वहां इसकी पहचान 'Chondrostereum purpureum' के रूप में हुई।

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डॉक्टर्स ने रिपोर्ट में बताया, "फोड़े से पस को पूरी तरह से बाहर निकालने के बाद, मरीज को दो महीने तक दवाओं पर रखा गया। दो साल लगातार फॉलो अप के बाद मरीज की स्थिति ठीक थी और न ही फोड़े के दोबारा पनपने का कोई संकेत मिला।"

Chondrostereum purpureum एक तरह का प्लांट फंगस है। इससे सिल्वर लीफ बीमारी (Silver Leaf Disease) होती है। ये बीमारी ज्यादातर गुलब के पौधे को अपनी चपेट में लेती है।

इस बीमारी का नाम सिल्वर लीफ इसलिए रखा गया है, क्योंकि जिस भी पेड़ या पौधे पर ये फंगस लगता है, उसकी शाखाओं पर सफेद चमकदार पत्ते निकाल आते हैं।

डॉक्टरों ने रिपोर्ट में कहा कि सिल्वर लीफ बीमारी काफी तेजी से बढ़ती है और अक्सर घातक होता है। ये फंगस भी केवल उन लोगों को अपनी चपेट में लेता है, जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है।

डॉक्टरों ने कहा, "प्लांट पैथोजेंस के कारण ही जानवरों और इंसानों में ये बीमारी हो सकती है। ये इस तरह की एक नई जानकारी निकल कर सामने आई है। कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए ये खतरनाक और इस तरह के संक्रमण के ट्रेंड को लेकर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

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