दिल्ली सरकार (Delhi government) ने टेस्ट में चूक करने वाले लोगों की बढ़ती संख्या के चलते कई ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक (automated driving test tracks) में बदलाव करने के आदेश दिए हैं। एक अधिकारी ने इस बात की जानकारी दी है। परिवहन विभाग (Transport Department) ने इस मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की थी। जिसमें कुछ बदलाव करने की सिफारिश की गई थी। ये बदले हुए नए नियम 8 अगस्त से लागू हो जाएंगे।
एक अधिकारी ने बताया कि ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर टेस्ट देते हुए बड़ी संख्या में लोग फेल हो जाते थे, जो ड्राइविंग से जुड़े हुए नहीं थे। नए निमयों से लोगों को ड्राइविंग टेस्ट में सहुलियत मिलेगी और उनके लिए टेस्ट देना आसान हो जाएगा। हालांकि इन सुधारों से रोड सेफ्टी से किसी प्रकार का समझौता नहीं होगा।
आखिरी क्यों होते हैं फेल?
अंतिम सर्कल की चौड़ाई जिस पर दोपहिया वाहन चालकों को स्पाइरल रूट पर जाना था। यह अन्य दो सर्कल के मुकाबले काफी कम था। इससे लोगों को अपने पैर जमीन पर रखने पड़ते थे। ऐसे में वो ड्राइविंग टेस्ट में फेल हो जाते थे। उम्मीदवारों के ड्राइविंग टेस्ट में फेल होने के कारण पेंडेंसी (pendency) भी बढ़ रही थी। अधिकारी ने कहा कि जो लोग ड्राइविंग टेस्ट में फेल हो जाते हैं, उन्हें आमतौर पर अगले हफ्ते नई तारीख मिल जाती है। लेकिन इस तरह के मामलों में पेंडेंसी बढ़ती जा रही है।
अधिकारी ने आगे कहा कि अब अंतिम सर्कल की चौड़ाई पिछले दो सर्कल्स की चौड़ाई के बराबर होगी। इतना ही नहीं लोगों को अपने पैरों का उपयोग करने की अनुमति दी जाएगी। पहले के नियमों में महिलाओं को भी कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। जिससे इन लोगों ने अप्लाई करना बंद कर दिया था। वहीं कई बार उम्मीदवार ड्राइविंग टेस्ट पूरा कर लेता था, लेकिन बाद में पता चलता था कि उसने सीट बेल्ट ही नहीं लगाई थी। ऐसे में अब नए निमयों के मुताबिक, उम्मीदवारों को ड्राइविंग टेस्ट में बैठने के दौरान सीट बेल्ट पहनने की जानकारी पहले से देनी होगी।