अगर आप भी ऑनलाइन वॉलेट पर लोन लेकर अपना खर्च मैनेज करते हैं तो अब आपको दिक्कत हो सकती है। RBI ने 20 जून को साफ-साफ कह दिया है कि कोई भी फिनेटक कंपनी वॉलेट्स या प्रीपेड कार्ड्स के जरिए क्रेडिट लाइन की सुविधा नहीं दे सकते हैं। क्रेडिट लाइन के मायने हैं कि ग्राहक एक सीमा तक पैसे उधार ले सकते हैं।
वॉलेट और प्रीपेड कार्ड्स जैसे प्रोडक्ट प्रीपेड पेमेंट इंस्ट़्रूमेंट्स (PPIs) में आते हैं। RBI का नोटिफिकेशन 'सभी अथॉराइज्ड नॉन-बैंक प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट (PPI)' इश्यू करने वाली कंपनियों के लिए है। के लिए है।
RBI के स्पष्टीकरण के मुताबिक, "PPI-MD पीपीआई में क्रेडिट लोडिंग की इजाजत नहीं देता है। अगर पहले से ऐसा हो रहा है तो इस पर तुरंत रोक लगाना जरूरी है। इस मामले में नियमों का पालन नहीं करने पर पेमेंट एंड सेटलमेंट्स सिस्टम्स एक्ट, 2007 के तहत कानूनी कार्रवाई हो सकती है।"
अभी यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है कि RBI के इस नोटिफिकेशन का क्या असर पड़ेगा। अभी Slice, Uni, PayU's LazyPay, KreditBee जैसी कई फिनटेक प्रीपेड को-ब्रांडेंड कार्ड्स के जरिए क्रेडिट की सुविधा देती हैं। लेकिन, ऐसे कार्ड के मुख्य इश्यूअर्स SBM Bank India, RBL Bank जैसे बैंक होते हैं।
कुछ मामलों में कार्ड इश्यू तो बैंक करते हैं, लेकिन क्रेडिट लाइन की सुविधा फिनटेक के NBFC पार्टनर्स की तरफ से दी जाती है। ऐसे NBFC पार्टनर्स पर RBI के निर्देश का क्या असर पड़ेगा, यह भी स्पष्ट नहीं है।
RBI के निर्देश का मतलब यह हो सकता है कि अगर क्रेडिट लाइन नॉन-बैंक की तरफ से दी जाती है तो अब ऐसे प्रोडक्ट का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इस बारे में मनीकंट्रोल के सवाल के जवाब में Slice के फाउंडर और सीईओ राजन बजाज ने कहा, "हम इस रेगुलेशन की स्टडी कर रहे हैं। हम पूरी तरह से रेगुलेशन का पालन करना चाहते हैं। हम अपने पार्टनर बैंकों के साथ इस पर बातचीत कर रहे हैं।"
RBI के इस स्पष्टीकरण में यह भी कहा गया है कि PPI Master Direction सिर्फ इन इंस्ट्रूमेंट्स को कैश में लोडेड/रीलोडेड, बैंक अकाउंट, क्रेडिट और डेबिट कार्ड्स से डेबिट और इंडिया में रेगुलेटेड इंटिटीज की तरफ से जारी दूसरे पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स की इजाजत देते हैं। इन्हें सिर्फ रुपया में लोड किया जा सकता है।
डिजिटल लेंडिंग पर डिटेल गाइडलाइंस का इंतजार है। उम्मीद है कि RBI जल्द इन्हें जारी करेगा। RBI कई तरीकों से फिनटेक को रेगुलेट करने की कोशिश कर रहा है। RBI के मास्टर डायरेक्शन ने क्रेडिट या प्रीपेड कार्ड्स की मार्केटिंग और डिस्ट्रिब्यूशन में को-ब्रांडेड कंपनियां की भूमिका सीमित कर दी है। इससे कार्ड जारी करने वाली फिनटेक कंपनियों के बिजनेस मॉडल पर संकट के बादल दिख रहे हैं।