इस वित्त वर्ष 6.4% की रफ्तार से बढ़ेगी अर्थव्यवस्था, ADB ने नहीं बदला अपना अनुमान

Indian Economy Growth Outlook: चालू वित्त वर्ष 2023-24 में भारतीय इकनॉमी की रफ्तार में फिलहाल किसी बदलाव के आसार नहीं दिख रहे हैं। यह मानना है कि एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) का। एडीबी के मुताबिक मजबूत घरेलू मांग के दम पर इस वित्त वर्ष में देश की इकनॉमी 6.4 फीसदी और अगले वित्त वर्ष 2024-25 में 6.7 फीसदी की रफ्तार से बढ़ेगी

अपडेटेड Jul 19, 2023 पर 9:23 AM
अप्रैल में एडीबी ने अनुमान लगाया था कि सख्त मौद्रिक स्थितियों और तेल की ऊंची कीमतों के कारण चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर घटकर 6.4 फीसदी रहने की उम्मीद है। आज इसमें एडीबी ने कोई बदलाव नहीं किया।

Indian Economy Growth Outlook: चालू वित्त वर्ष 2023-24 में भारतीय इकनॉमी की रफ्तार में फिलहाल किसी बदलाव के आसार नहीं दिख रहे हैं। यह मानना है कि एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) का। एडीबी ने आज बुधवार 19 जुलाई को देश की इकनॉमिक ग्रोथ के अपने अनुमान में कोई बदलाव नहीं किया। इसके मुताबिक मजबूत घरेलू मांग के दम पर इस वित्त वर्ष में देश की इकनॉमी 6.4 फीसदी और अगले वित्त वर्ष 2024-25 में 6.7 फीसदी की रफ्तार से बढ़ेगी। अप्रैल में एडीबी ने अनुमान लगाया था कि सख्त मौद्रिक स्थितियों और तेल की ऊंची कीमतों के कारण चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर घटकर 6.4 फीसदी रहने की उम्मीद है। पिछले वित्त वर्ष 2022-23 में इकनॉमी 7.2 फीसदी की रफ्तार से बढ़ी थी।

महंगाई से राहत के आसार

एशियन डेवलपमेंट आउटलुक में एडीबी का कहना है कि एशियाई देशों में महंगाई की बढ़ती रफ्तार में आगे भी गिरावट जारी रहने के आसार हैं। रिपोर्ट के मुताबिक तेल और खाने की कीमतें गिर रही हैं जिसके चलते इंफ्लेशन यानी महंगाई दर कोरोना से पहले के स्तर पर पहुंच सकती है। इस साल एशिया के उभरते देशों में 3.6 फीसदी की दर से महंगाई बढ़ सकती है और अगले साल 2024 में 3.4 फीसदी की दर से।


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इनसे ग्रोथ को मिल रहा सपोर्ट

एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) के मुख्य अर्थशास्त्री अल्बर्ट पार्क के मुताबिक एशिया और पैसेफिक लगातार स्थिर चाल से महामारी से उबर रहे हैं। अल्बर्ट का कहना है कि घरेलू मांग और सर्विस सेक्टर की गतिविधियां विकास को रफ्तार दे रही हैं, जबकि कई देशों को पर्यटन में मजबूत सुधार से भी फायदा मिल रहा है। हालांकि औद्योगिक गतिविधियां और निर्यात कमजोर बने हुए हैं और अगले साल वैश्विक विकास और मांग को लेकर स्थिति और खराब दिख रही है।

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